पार्षद अमित चौधरी कहते हैं कि स्वकर निर्धारण शुरू हो जाए तो कम से कम दो लाख और मकान गृहकर के दायरे में आ जाएंगे। शहर में तमाम कॉलोनियां ऐसी हैं, जो दस साल पहले बस चुकी हैं, पर यहां कर निर्धारण नहीं किया गया है। कार्यकारिणी सदस्य मो. सलीम, पार्षद राजकुमार सिंह राजा, शैलेंद्र सिंह बल्लू कहते हैं कि स्वकर प्रणाली लागू होने से नगर निगम की आय भी बढ़ेगी।
ऐसे होगी गृहकर की गणना
एक साल के गृहकर की गणना के लिए सबसे पहले कारपेट एरिया निकालेंगे। ड्राइंग रूम और कमरों का पूरा क्षेत्रफल, किचन, स्टोर, बालकनी और कॉरीडोर के 50 प्रतिशत क्षेत्रफल को जोड़ेंगे। इसके बाद कुल कारपेट एरिया निकल आएगा। इसे तय गृहकर मासिक दर से गुणा करेंगे और जो आएगा उसे 12 से गुणा करेंगे। ऐसा करने पर भवन का वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) निकल आएगा। इसे 15 से भाग देंगे। इसके बाद जो आएगा, वह एक साल का गृहकर होगा।
खुद रहते हैं तो टैक्स कम
हाउस टैक्स एआरवी का 15 प्रतिशत लिया जाता है। यदि भवनस्वामी खुद उसमें रहता है तो टैक्स कम लगता है। भवन दस साल तक पुराना है तो 25, दस साल से अधिक और बीस साल से कम पुराना है तो 32.5 और बीस साल से अधिक पुराना है तो 40 प्रतिशत एआरवी कम हो जाएगी। जो एआरवी आएगी उस पर 15 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
भवन किराये पर है तो उसकी एआरवी बढ़ाने का नियम है। भवन दस साल तक पुराना है तो 25, दस साल से अधिक और बीस साल से कम पुराना है तो 12.5 और बीस साल से अधिक पुराना है तो एआरवी में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी। जो एआरवी आएगी उस पर 15 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
- कच्चे-पक्के मकान के आधार पर हैं दरें
गृहकर की गणना के लिए नगर निगम की ओर से क्षेत्र की लोकेशन, विकास की स्थिति, सड़क की चौड़ाई और मकान कच्चा है या पक्का या आरसीसी की छत वाला है, उसके आधार पर दरें तय की गई हैं। यह 50 पैसे प्रतिवर्ग फीट से लेकर दो रुपये 50 पैसे प्रति वर्ग फीट तक है।
- किस पर कितना लगता है टैक्स
- कमरे व ड्राइंग रूम के पूरे क्षेत्रफल पर
- किचन, स्टोर, बालकनी, कॉरीडोर के 50 प्रतिशत क्षेत्रफल पर
- गैराज के 25 प्रतिशत क्षेत्रफल पर
- स्नान गृह, शौचालय, पोर्टिको व जीने के नीचे के एरिया पर टैक्स नहीं।