फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केजरी, मोदी की चर्चा पर काशी में पसर गया सन्नाटा

Wed, 14 May 2014 03:08 AM IST
मनोज श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
चुनावी तूफान के बाद अब काशी शांत है, यहां केजरीवाल और मोदी की चर्चा तो है पर समर्थकों में तुर्शी गायब है और काशी भी अब ऐसे शांत है जैसे कुछ हुआ ही न हो।
विज्ञापन


चुनावी शोर थम गया। नेताओं के भाग्य ईवीएम में बंद हैं। चुनावी सूरमा परदेसी पंछियों की तरह अपने-अपने घोंसलों की तरफ उड़ गए तो जो स्थानीय हैं वे थकान उतार रहे हैं।

चाय व पान की अड़ियों पर समर्थक आपस में बहसों में व्यस्त हैं, पर वह तुर्शी गायब है जो कल तक मोदी टोपी और झाड़ू वालों के आमने-सामने होने पर होती थी।

स्कूलों में छुट्टी होने के कारण सड़कों पर सन्नाटा कुछ ज्यादा ही पसरा है। नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल के आमने-सामने चुनाव लड़ने के कारण काशी का चुनाव कुछ ज्यादा ही हाइप्रोफाइल हो गया।
विज्ञापन

Trending Videos

अब नहीं हर हर मोदी का उद्घोष

काशी में मोदी के उफान के बावजूद केजरीवाल समर्थकों के जुनून ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया था। एक तरफ हर-हर मोदी के उद्घोष के साथ भाजपा समर्थक आक्रामक मुद्रा अपनाए रहे तो विरोध में दिल्ली और मुंबई से आए केजरीवाल समर्थक टोपी व और झाड़ू के साथ पीछे नहीं हटे।

पर, मंगलवार को सड़कों पर न तो केसरिया टोपी, मोदी टी-शर्ट दिखी और न ही दिल्ली, मुंबई से आईं महिलाओं के हाथ में झाड़ू।

मोदी, अहमदाबाद में अपने उत्तराधिकारी के चयन की कवायद में व्यस्त थे तो केजरीवाल दिल्ली में अपनी कोर कमेटी के सदस्यों के साथ इस बात का ताना-बाना बुनते रहे कि काशी में अपनी सक्रियता कैसे बरकरार रखी जाए।

वीरान से नजर आए होटल-लॉज

शहर के होटल व लॉज जिनमें कमरों के लिए बीते दिनों खूब जद्दोजहद थी, वे वीरान से नजर आए। कुछ होटलों में ज्यादा कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई हैं क्योंकि पिछले दिनों काफी भीड़ भाड़ के कारण उन्हें साप्ताहिक अवकाश भी नसीब नहीं हो सका था।

पार्टी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा है। जिन पोस्टरों और बिल्लों के लिए कल तक मारामारी थी, मंगलवार सुबह झाड़ू की भेंट चढ़ते नजर आए।

अक्सर दिल्ली-मुंबई जाने वाले एक कारोबारी बता रहे हैं कि काफी दिनों बाद बाबतपुर हवाई अड्डे के बाहर राजनीतिक दलों के वाहनों की कतारें नहीं दिखीं।
विज्ञापन

भाजपाई खेमे में निश्चिंतता

पप्पू की चाय की अड़ी पर भी नहीं वो चहल-पहल: अस्सी पर पप्पू की चाय की अड़ी पर वैसी चहल-पहल नहीं है, जैसी पिछले डेढ़ महीने से रहती थी। नतीजों की निश्चिंतता के कारण भाजपाई संयमित हैं।

अलबत्ता इन अड़ियों और सट्टा बाजार में मोदी की संभावित कैबिनेट बनती-बिगड़ती रही। बुनकरों के मोहल्लों में भी खटपट के बीच चुनाव परिणाम को लेकर उत्सुकता दिखी।

घाटों पर फिर लौटी शांति
सियासत के शोर से दूर घाट फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट आए। बजरों (बड़ी नावों) को श्रद्धालु ही किराए पर ले रहे हैं। कोई चैनल वाला उनसे मनुहार नहीं कर रहा है। चौराही नेताओं को भी बाइट के लिए भाव नहीं मिल रहा था।

कलफ लगा कुर्ता पहने, पान खाए सब दूल्हे की तरह पान की दुकानों पर तो नजर आए पर उनसे मुखातिब होकर उनकी राय लेने वाला कोई नहीं था। गंगा की लहरें भी शांत हैं, वह अपनी पुरातन गति से बह रही हैं, जैसे पिछले दिनों काशी में कुछ हुआ ही न हो।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें