अमेठी में राहुल गांधी को चुनौती देने वाले कुमार विश्वास ने एक्जिट पोल में आम आदमी पार्टी के पिछड़ने पर माना कि उनकी पार्टी ने कई गलतियां की, वहीं दिल्ली में सरकार गिराने के फैसले को उनकी पार्टी जनता को न समझा सकी।
एग्जिट पोल में खराब प्रदर्शन की खबरों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के कुमार विश्वास और शाजिया इल्मी ने मंगलवार को माना कि लोकसभा चुनाव के दौरान और उससे पहले कई फैसले जल्दबाजी में लिए गए।
पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सौ सीट जीतने का दावा करते हुए लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान शुरू किया था।
दिल्ली की सफलता के बाद आम लोगों में भी उम्मीद जगी थी कि पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन चुनाव का जोर पकड़ने के बाद पार्टी पिछड़ती गई।
चुनाव राजनीति का हिस्सा
कई प्रत्याशियों ने तो केंद्रीय स्तर से मदद न मिलने की बात करते हुए उम्मीदवारी से नाम वापस ले लिया। वहीं, पार्टी के स्टार प्रचारक कुमार विश्वास अमेठी में सिमट कर रह गए।
जबकि दिल्ली में चुनाव होने के बाद केजरीवाल ने खुद को काशी तक सीमित कर लिया। खास बात यह रही कि पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने अपना ज्यादातर समय काशी संसदीय सीट पर गुजारा।
अब एग्जिट पोल में ‘आप’ की तस्वीर अच्छी नहीं दिख रही है। कोई भी उसे दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंचा रहा। हालांकि, पार्टी एग्जिट पोल को हवा-हवाई मान रही है।
वरिष्ठ नेता संजय सिंह वर्ष 2004 व 2009 के पोल हवाला दे रहे हैं, लेकिन कुमार विश्वास का कहना है कि पार्टी ने कई फैसले जल्दबाजी में लिए। हालांकि, उनका मानना है कि चुनाव राजनीति का एक छोटा सा हिस्सा है।
योगेंद्र यादव को है उम्मीद
एग्जिट पोल में पार्टी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए माना जा रहा है कि ‘आप’ राष्ट्रीय पार्टी की हैसियत पाने के लिए चार सौ से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही थी।
इस बात को बल वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव के एक ट्वीट से मिला। उन्होंने लिखा है कि दिल्ली और पंजाब के अलावा ‘आप’ को दो अन्य राज्यों में 6 फीसदी वोट की जरूरत है। इससे उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा।
यादव को उम्मीद हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड से है। ज्यादातर एग्जिट पोल दिल्ली और पंजाब में ‘आप’ को मिले वोट का हिस्सा दस फीसदी से ज्यादा दिखा रहे हैं।
पार्टी की संभावना पर कुमार विश्वास ने कहा कि हमने कई फैसले जल्दबाजी में लिए। कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जिसे नहीं लिया जाना चाहिए था। दिल्ली की सरकार से हटने का फैसला हम आम लोगों को नहीं समझा सके।
सौ सीटों की थी उम्मीद
गौरतलब है कि केजरीवाल का दावा था कि आप देश भर में सौ सीटें जीतने में कामयाब रहेगी और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी लेकिन एक्जिट पोल में पार्टी को दहाई के अंक तक भी पहुंचते हुए नहीं दिखाया जा रहा है।
वहीं केजरीवाल ने भी अपने इंटरव्यू में माना था कि वह दिल्ली में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का कारण जनता को समझा नहीं सके।
हालांकि केजरीवाल ने यह भी दोहराया कि वह राजनीति में किसी पद की उम्मीद के साथ नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का मकसद लेकर आए हैं।
केजरीवाल ने उन पर और उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के लिए मोदी के समर्थकों को दोषी ठहराया।