नए आकार में राममंदिर पहले से दोगुना भू-भाग में बनेगा। अब तीन की जगह पांच गुंबद होने से लंबाई की अपेक्षा चौड़ाई में ज्यादा वृद्धि हो रही है। लेकिन राममंदिर की खासियत विश्व हिंदू परिषद की ओर से 37 साल पहले की गई भगवान विष्णु मंदिर के नागर शैली जैसी ही रहेगी, गर्भगृह यथावत अष्टकोणीय रहेगा। यह खुलासा यहां श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में अपने इंजीनियर भाई निखिल चंद्रकांत सोमपुरा के साथ शामिल रहे आशीष चंद्रकात ने सोमवार को अमर उजाला से खास बातचीत में किया।
विश्व हिंदू परिषद के राममंदिर मॉडल को अहमदाबाद के प्रख्यात वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने 37 साल पहले विहिप के शीर्ष नेता अशोक सिंहल के प्रस्ताव पर डिजाइन किया था। बाद में इसी मॉडल का रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए पूज्य संत देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेकर देश के शीर्ष संतों के सानिध्य में संकल्प लिया गया था। करोड़ों रुपये रामभक्तों से चंदा लेकर मंदिर की 60 फीसदी तैयारी भी पूरी हो गई थी। राममंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विहिप इसी मॉडल के मंदिर पर अड़ा हुआ था।
जब सरकार ने श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया तो उसमें विहिप-संघ के बहुमत के कारण संभावना प्रबल थी कि मंदिर के आकार-प्रकार में कोई बदलाव नहीं हो सकता। मगर, तमाम शीर्ष संतों समेत आमजन में मंदिर की ऊंचाई समेत भव्यता को और बढ़ाने की मांग उठी तो, शनिवार को ट्रस्ट की बैठक में डिजाइन बदलने पर सहमति बनीं।
बैठक में शामिल रहे आशीष सोमपुरा रविवार को सुबह अपने बड़े भाई निखिल सोमपुरा के साथ से लखनऊ एयरपोर्ट से अहमदाबाद पहुंचे। आशीष ने बताया कि शनिवार को ही देर रात ट्रस्ट अध्यक्ष के आश्रम पर हुई बैठक में वे नई डिजाइन का एक स्केच बनाकर प्रजेंटेशन दिए। अतिशीघ्र 3-डी डिजाइन व मास्टर प्लान तैयार करना है, इसके लिए अहमदाबाद आ गए हैं।
उनके मुताबिक ट्रस्ट ने मंदिर की ऊंचाई अब 128 फीट से बढ़ाकर 161 फीट तय की है, जबकि लंबाई 268.5 फीट से बढ़कर अब 280 से 300 फीट के बीच आ रही है। लेकिन सबसे अधिक बदलाव मंदिर की चौड़ाई को लेकर है, इसकी वजह तीन गुंबदों का बढ़ना है।
पहले चौड़ाई 140 फीट थी, जो बढ़कर 272 फीट से 280 फीट के बीच हो रही है। इस बदलाव से पहले जहां मंदिर की एरिया 37 हजार 590 फीट था, वहीं अब 76 हजार से 84 हजार के बीच हो जाएगा। आकार अब करीब दोगुना बढ़ जाने से शिलाओं की जरूरत से लेकर आकार-प्रकार का नए सिरे से मूल्यांकन किया जा रहा है। मंदिर की ऊंचाई 33 फीट बढ़ने एक तल बढ़ाना पड़ा है, हालांकि वह खाली रहेगा।
श्री सोमपुरा ने कहा कि इन सब बदलाव से मंदिर के मॉडल में कोई बदलाव नहीं आएगा। उनका कहना था कि मंदिर निर्माण में ढाई साल का समय आंका गया है, इसके लिए एनबीसीसी व एलएंडटी को युद्धस्तर पर काम के साथ राजस्थान की भरतपुर की खदानों से पत्थरों की निकासी से लेकर तराशी में कारीगरों की भारी-भरकम टीम जुटेगी।