चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों पर शिकंजा कसते हुए हॉस्टल व सिक्योरिटी फीस निर्धारित कर दी है। साथ ही शैक्षणिक व हॉस्टल फीस को हर वर्ष लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी कि अब एमबीबीएस व बीडीएस के छात्रों को पूरे पाठ्यक्रम की फीस एक साथ नहीं भरनी होगी।
इसके अलावा निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज सिक्योरिटी के रूप में एक बार ही अधिकतम तीन लाख रुपये ले सकेंगे। जबकि हॉस्टल फीस अधिकतम 1.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। प्रमुख सचिव रजनीश दुबे ने सोमवार को इससे संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है।
शासन के अनुसार निजी क्षेत्र के मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में सिक्योरिटी व हॉस्टल शुल्क केनाम पर छात्रों से मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायतें मिल रही थी। साथ ही पूरे एमबीबीएस या बीडीएस कोर्स का शुल्क हर साल लेने की जगह एक साथ लेने की शिकायतें शासन को मिली थी।
इसके बाद प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने शासन से निर्धारित शैक्षणिक शुल्क व अन्य शुल्क हर साल जमा कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता और संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में इस आदेश का पालन कराएं। प्रमुख सचिव ने किसी भी हालत में एडवांस में शुल्क न लिए जाने को निर्देश दिए हैं।