इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सम्मिलित राज्य/ प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (पीसीएस-प्री 2018) का परिणाम संशोधित कर नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने प्रदेश की महिलाओं को दिए क्षैतिज आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 16 के विपरीत बताया और इसे खारिज कर दिया।
अदालत ने यह आदेश दिल्ली की अभ्यर्थी खुशबू बंसल की याचिका पर दिया। याचिका में राज्य सरकार के नौ जनवरी, 2017 के उस आदेश को चुनौती दी गई जिसके तहत परीक्षा में यूपी की महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इसमें राज्य की महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण मिलता है, जबकि अन्य राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य अभ्यर्थी की श्रेणी में शामिल किया जाता है। इस परीक्षा के परिणाम 30 मार्च, 2019 को घोषित किए गए थे।