आलमबाग, चारबाग और मुंशीपुलिया के बाद अब जियामऊ और फन मॉल के सामने सड़क पर फुटओवर ब्रिज बनेंगे। इनके बनने के बाद शहर में पांच फुट ओवर ब्रिज हो जाएंगे।
जो नए फुट ओवर ब्रिज बनेंगे उनका निर्माण बीओटी मॉडल पर किया जाएगा। फुटओवर ब्रिज बन जाने के बाद लोहिया पथ पर फन मॉल और जियामऊ के पास सड़क के एक ओर से दूसरी ओर आनाजाना आसान हो जाएगा।
इनका निर्माण जल्द हो इसके लिए नगर निगम की ओर से टेंडर भी आमंत्रित कर दिए गए हैं।इस बार जो फुट ओवर ब्रिज बनेंगे वह तकनीकि और मॉडल में अलग होंगे।
पिछली बार तीनों फुटओवर ब्रिज का निर्माण सरकारी धन से किया गया था लेकिन इस बार सरकार पैसा खर्च नहीं करेगी।
इसके लिए बीओटी माडल अपनाया जाएगा। इसमें निजी कंपनी निर्माण करेगी और इसके एवज में वह दस साल तक उस पर विज्ञापन कर आय कर सकेगी।
इसके बाद वह फुटओवर ब्रिज को नगर निगम के अधिकार में सौंप देगी।दिल्ली व देश के कई अन्य शहरों में बीओटी माडल पर निजी कंपनियों खासकर बड़ी विज्ञापन एजेंसियों ने फुटओबर ब्रिज बनाए हैं।
उनमें से एक दिल्ली की विज्ञापन कंपनी ने नगर निगम को इसका प्रस्ताव भी दिया है। इसी तरह राजधानी की भी एक कंपनी ने प्रस्ताव दिया है।
इसमें दोनों कंपनियों ने फुटओवर ब्रिज निर्माण के एवज में तीस साल तक विज्ञापन करने की अनुमति दिए जाने की मांग की है।
जिस पर निगम प्रशासन न सहमत नहीं हुआ। उसके बाद निगम ने इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं जिसमें दस साल तक के लिए ही निजी कंपनी को विज्ञापन से आय की अनुमति दी जाएगी।
दो से ढ़ाई करोड़ होंगे खर्च
राजधानी की एक निजी कंपनी की ओर से फुटओवर ब्रिज का जो प्रस्ताव दिया गया है उसमें बिना एक्सक्लेटर वाले फुटओवर ब्रिज की लागत दो करोड़ रुपए बताई गई है।
वहीं एक्सक्लेटर वाले फुटओवर ब्रिज की लागत ढ़ाई करोड़ रुपए बताई गई है। जो कम्पनी फुटओवर ब्रिज बनाएगी वह विज्ञापन से इस खर्च की भरपाई करेगी।
विज्ञापन से होगी अच्छी कमाई
लोहिया पथ पर इस समय होर्डिंग (स्थल वाली) लगाने पर रोक है। ऐसे में जो फुटओवर ब्रिज बनेंगे उन पर विज्ञापन का रेट कंपनियां अधिक वसूल करेंगी।
एक विज्ञापन एजेंसी मालिक ने बताया कि एक फुट ओवर ब्रिज से सालाना 50 लाख रुपए से अधिक की आमदनी विज्ञापन से होगी।
इस समय एक अच्छी लोकेशन के एक गैंट्री पर विज्ञापन करने का करीब एक लाख रुपए महीना लिया जाता है।
एक्सक्लेटर वाले होंगे फुटओवर ब्रिज
आलमबाग, चारबाग और मुंशीपुलिया में जो फुटओवर ब्रिज बने हैं उनके उतरने चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी है लेकिन जो नए फुटओवर ब्रिज बनेंगे उनमें एक्सक्लेटर लागए जाने की भी योजना है।
इसके लिए निजी कंपनियों से एक्सक्लेटर व बिना एक्सक्लेटर दोनों तरह के फुटओवर ब्रिज के प्रस्ताव मांगे गए हैं।
टू बिड सिस्टम से दिया जाएगा टेंडर
फुटओवर ब्रिज के निर्माण केलिए टू बिड टेंडर (तकनीकि व वित्तीय) प्र्रक्रिया अपनाई जाएगी। जो कंपनी दोनों प्रक्रिया में पास होगी उसी को निर्माण का जिम्मा दिया जाएगा।
जो कंपनियां इसके लिए आगे आएंगे उनको 12 अप्रैल तक टेंडर भरकर नगर निगम में जमा करना होगा। नगर अभियंता एसके जैन का कहना है कि फुटओवर ब्रिज पर कितनी लागत आएगी अभी यह तय नहीं है।
जो कम्पनियां फुटओवर ब्रिज बनाने के लिए आगे आएंगी, वही अपनी लागत बताएंगी। जो कंपनी बनाएगी उसे दस साल तक विज्ञापन की अनुमति दी जाएगी।