लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षिक सत्र 2019-20 से स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में एक सेमेस्टर की परीक्षा मल्टीपल चॉयस क्वेश्चन (एमसीक्यू) प्रणाली पर होगी। विश्वविद्यालय में फिलहाल बीए, बीएससी और बीकॉम की सम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए ओएमआर पर बहुविकल्पीय सवाल आधारित परीक्षा प्रणाली लागू है। अगले सत्र से लविवि में स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद इनकी एक सेमेस्टर की परीक्षा लिखित और एक ओएमआर शीट पर होगी।
विवि में शैक्षिक सत्र 2018-19 से स्नातक स्तर पर पहली बार पूरी तरह से सेमेस्टर प्रणाली लागू हुई है, जिसके बाद बीए, बीएससी और बीकॉम की परीक्षाएं भी सेमेस्टर प्रणाली पर होने लगी हैं। परीक्षा परिणाम जल्द घोषित करने के लिए सम सेमेस्टर की परीक्षाएं ओएमआर शीट पर कराने का निर्णय लिया गया है। हालांकि एलएलबी, बीसीए, बीबीए, बीकॉम ऑनर्स जैसे पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर प्रणाली पहले से लागू थी। मगर इनके सभी सेमेस्टर की परीक्षा लिखित ही होती थी। अब इसमें बदलाव किया जाएगा। बीए, बीएससी और बीकॉम की तर्ज पर सभी पाठ्यक्रमों में एक सेमेस्टर की परीक्षा बहुविकल्पीय सवालों पर आधारित होगी।
ज्यादातर कोर्स में लागू है इंटरनल नंबर की व्यवस्था
सेमेस्टर प्रणाली लागू करने के साथ ही इंटरनल नंबर की व्यवस्था भी की गई है। इनमें हर पेपर में 80 नंबर की थ्योरी और 20 नंबर सेशनल या इंटरनल के हैं। इस समय एलएलबी ऑनर्स, बीसीए और बीबीए आदि पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर के साथ ही इंटरनल के नंबर की व्यवस्था भी लागू हुई है।
90 मिनट की होगी परीक्षा
ओएमआर शीट पर होने वाली सम सेमेस्टर की परीक्षा का समय भी तीन घंटे के बजाय 90 मिनट ही होगा। इन 90 मिनट में विद्यार्थी को 80 बहुविकल्पीय सवालों के जवाब देने होंगे। बीए, बीएससी और बीकॉम के विभागाध्यक्षों को काफी संख्या में बहुविकल्पीय सवाल तैयार करने के लिए कहा गया है। ओएमआर शीट पर पहली परीक्षा समाप्त होने के बाद बचे हुए पाठ्यक्रमों में इसकी शुरुआत करने के लिए तैयारी के निर्देश दिए जाएंगे।
प्रश्नपत्रों में भी हो सकती है एकरूपता
विवि में इस समय बीए, बीएससी और बीकॉम तीनों पाठ्यक्रमों के हर सेमेस्टर में छह-छह पेपर होते हैं। हर पेपर में चार यूनिट और एक यूनिट में शिक्षण कार्य के लिए 10 घंटे का समय अनिवार्य किया गया है। प्रश्नपत्र चार क्रेडिट का है। पेपर में पास होने के लिए 36 फीसदी और कुल मिलाकर 40 फीसदी नंबर लाने अनिवार्य हैं। माना जा रहा है कि एकरूपता के लिए यह व्यवस्था सभी पाठ्यक्रमों के लिए होगी।
सभी पाठ्यक्रमों में समानता है मकसद
बीए, बीएससी और बीकॉम में सबसे ज्यादा विद्यार्थी हैं। इसलिए हमने सबसे पहले इसी से बहुविकल्पीय सवाल आधारित परीक्षा की शुरुआत की। हमारा मकसद सभी पाठ्यक्रमों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है। इसलिए नये सत्र में बचे हुए पाठ्यक्रमों पर भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
- प्रो. एसपी सिंह,
कुलपति, लविवि