देश में भले ही दुराचारियों को सबक सिखाने और ऐसी घिनौनी वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए आवाज उठ रही हो, प्रदेश सरकार ऐसे मामलों को वापस लेने की तैयारी में जुट गई है।
कासगंज के एक ऐसे ही मामले में राज्य सकार ने जिला प्रशासन को मामला वापस लेने के लिए बाकायदा आदेश जारी किए हुए हैं। इस मामले में एक आरोपी सपा का पदाधिकारी है।
जिस मामले को वापस लेने के आदेश हुए हैं, वह सपा की पिछली सरकार के दौरान ही हुआ था।
कासगंज के ढोलना थाने में मुकदमा अपराध संख्या सी-22/2006 में धारा 395 व 376 के तहत दर्ज मुकदमे में एक दर्जन से अधिक लोगों को नामजद किया गया था।
जुलाई 2006 को हुई इस वारदात में सपा नेता व तब जिला पंचायत सदस्य विक्रम सिंह यादव भी नामजद हुआ था।
वह अब कासगंज में सपा का नगर अध्यक्ष है। सरकार ने विक्रम सिंह व अन्य के पक्ष में मुकदमा वापसी के सीधे आदेश किए हैं।
...और लगा दी एफआर
जब वारदात हुई थी तब सपा की सरकार थी, इसलिए उस समय पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस पर अदालत में गुहार लगाकर पीड़ित पक्ष ने मुकदमा दर्ज कराया था।
इस मामले में पुलिस ने यह कहते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी कि 14-15 लोगों के दिन के समय दूसरे गांव जाकर लूटपाट व दुराचार करने की बात संभव नहीं प्रतीत होती है। पुलिस ने आरोपियों के गांव के ही कुछ लोगों का बयान दर्ज कर उसे आधार बनाया।
डर के मारे पीड़ित का परिवार छोड़ चुका है गांव
पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट पीड़ित ने अदालत में प्रतिवाद किया, जिस पर अदालत ने आरोपियों को तलब कर लिया।
कुछ आरोपियों के बयान भी दर्ज हुए। लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि आरोपियों की धमकी से डर कर पीड़ित परिवार अपना गांव छोड़ कर अन्यत्र रह रहा है।
खत का मजमून
शासन के विशेष सचिव राजेंद्र कुमार की ओर से कासगंज के जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि ‘वाद के तथ्यों व उपलब्ध आख्या/पत्रादि पर समुचित विचारोपरांत शासन ने जनहित में उक्त वाद को वापस लेने का फैसला किया है।’
यह भी कहा गया कि ‘राज्यपाल महोदय द्वारा उपर्युक्त वाद के अभियोजन को वापस लेने हेतु लोक अभियोजक द्वारा न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की गई है। अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित करें तथा कृत कार्यवाही से शासन को भी अवगत कराने का कष्ट करें।’
नौ जनवरी को सुनवाई
सरकार के इस निर्देश पर डीएम कासगंज ने एटा के जिला शासकीय अधिवक्ता योगेंद्र कुमार को न्यायालय में आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। शासकीय अधिवक्ता ने अदालत में इसके लिए प्रार्थना पत्र दे दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई नौ जनवरी को तय की है।