नियमित डायलिसिस कराने वाले गुर्दे के मरीजों के लिए खुशखबरी है। प्रदेश सरकार अब हर मंडल में एक-एक डायलिसिस सेंटर खोलने जा रही है।
मंडल के लिहाज से खोले जाने वाले इन 18 डायलिसिस सेंटरों की स्थापना पीपीपी मॉडल के आधार पर होगी। मंडल मुख्यालय के प्रत्येक अस्पताल में 10-10 डायलिसिस मशीनें लगाई जाएंगी।
इससे हर दिन प्रत्येक अस्पताल में 40 से 50 मरीजों की डायलिसिस की जा सकेगी। सबसे खास बात यह है कि यहां मरीजों की डायलिसिस निशुल्क की जाएगी।
जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा न होने से गुर्दे के मरीजों को अक्सर बड़े शहरों के अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय व पैसा दोनों बर्बाद होता है।
सरकार ने मरीजों की इसी समस्या को देखते हुए अब डायलिसिस की सुविधा प्रत्येक मंडल मुख्यालय में देने का निर्णय किया है। इन सेंटरों की स्थापना पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर की जाएगी।
इसके लिए प्रदेश सरकार शीघ्र ही टेंडर आमंत्रित करेगी। इसके तहत निजी कंपनियों को प्रत्येक मंडल पर 10-10 बेड वाले डायलिसिस सेंटर खोलने होंगे।
सेंट्रल गवर्मेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के निर्धारित रेट से जो भी सबसे कम रेट पर डायलिसिस करने को राजी होगा उसे ही सेंटर खोलने की अनुमति दी जाएगी। सरकार इन अस्पतालों में डायलिसिस कराने वाले मरीजों से एक भी पैसा नहीं लेगी।
तीन से छह हजार का आता है खर्च
एक बार डायलिसिस कराने में तीन से छह हजार रुपये का खर्च आता है। लखनऊ में डायलिसिस की सुविधा पीजीआई, केजीएमयू, बलरामपुर व लोहिया अस्पतालों में है। बलरामपुर अस्पताल में एक डायलिसिस पर 400 रुपये फीस ली जाती है।
लेकिन डायलिसिस के लिए लगने वाली दवाओं का खर्च भी मरीजों को उठाना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में सबसे बड़ी दिक्कत नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी है। इससे सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस अक्सर बंद रहती है।
वहीं,पीजीआई में यह खर्चा ढाई से तीन हजार रुपये आता है। अगर निजी अस्पतालों में डायलिसिस कराई जाती है तो इसका खर्चा छह हजार रुपये से भी अधिक आता है।
यहां खुलेंगे डायलिसिस सेंटर
आगरा,अलीगढ़,आजमगढ़,इलाहाबाद,कानपुर,गोरखपुर,चित्रकूट,झांसी,देवीपाटन,मुरादाबाद,मेरठ,लखनऊ,वाराणसी,सहारनपुर,फैजाबाद,बरेली,बस्ती व विन्ध्याचल में डायलिसिस सेंटर खोले जाएंगे।
स्वास्थ्य के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि किडनी की बीमारी से आज बहुत से मरीज परेशान हैं। डायलिसिस की सुविधा बड़े शहरों में ही उपलब्ध है। इसलिए सरकार अब सभी मंडल मुख्यालयों पर डायलिसिस सेंटर खोलने जा रही है।
नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी से सरकार यह सेंटर पीपीपी मोड पर खोलेगी। मरीजों की डायलिसिस करने पर जितना भी खर्चा आएगा उसे प्रदेश सरकार उठाएगी। इसके लिए शीघ्र ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।