फिनायल से होने वाले खतरे को दूर करने के लिए अब काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) ने अपनी लैब में इसे प्रतिबंधित कर दिया है। इसकी जगह अब गाय के मूत्र से बना ‘गौनायल’ पोंछा लगाने के लिए उपयोग किया जाएगा। राजधानी स्थित चार लैब सहित सभी सीएसआईआर संस्थानों में ‘गौनायल’ की आपूर्ति केंद्रीय भंडार से होगी।
फिनायल के उपयोग को रोकने और ‘गौनायल’ को बढ़ावा देने का यह निर्णय सीएसआईआर के मुख्यालय ने एनिमल केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के एक पत्र के बाद लिया है। यह पत्र मेनका गांधी ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को लिखा था।
इसमें मंत्रालय के अधीन विभागों में फिनायल के उपयोग पर चिंता जताई गई थी। मेनका गांधी का कहना था कि फिनायल पर्यावरण के लिए सुरक्षित नहीं है। वहीं ‘गौनायल’ को पर्यावरण के लिए सुरक्षित और फिनायल से कहीं अधिक प्रभावी बताया गया था। इसी पत्र में गौनायल का स्टॉक केंद्रीय भंडार में उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई थी।
‘गौनायल’ कीटनाशक पोछा की तकनीक एनजीओ होली काऊ फाउंडेशन ने विकसित की है। ‘गौनायल’ में गाय के मूत्र के अलावा तुलसी और नीम के अर्क भी मिलाए गए हैं।