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स्वाइन फ्लूः 800 पहुंचा मरीजों का आंकड़ा

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स्वाइन फ्लू की चपेट में 47 और लोग आ गए हैं। नए मिले मरीजों में बारह बच्चे हैं जिसमें एक सात महीने की बच्ची है। वहीं पांच बुजुर्ग भी इसमें शामिल हैं। इसके साथ ही एच1एन1 वायरस की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या 798 पहुंच गई है।
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पिछले पंद्रह दिनों की बात करें तो औसत तीस मरीज स्वाइन फ्लू के मिल रहे हैं। वायरस के तेजी से फैलने से नवजात बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर भी खतरा मंडराने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग खुद से सावधानी और जरूरी एहतियात बरतें तो हालात को ठीक किया जा सकता है।

सीएमओ की रैपिड रिस्पांस टीम मरीजों को दवा बांटने में लगी है। मंगलवार को केजीएमयू और एसजीपीजीआई से आई जांच रिपोर्ट के बाद 47 नए मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई। मरीजों की संख्या में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग हलकान है और वायरस को कंट्रोल करने के लिए लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
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नए मिले मरीजों को टेमीफ्लू दवा देने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम शहर की खाक छान रही है। सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि  मरीजों को दवा देने के साथ उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है। मरीजों को कंट्रोल रूम का नंबर भी दिया जा रहा है जिससे वे इमरजेंसी में संपर्क कर मदद ले सकते हैं।

हाई रिस्क में छोटे बच्चे

डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान बताते हैं कि वायरस म्यूटेट कर चुका है इसलिए तेजी से फैल रहा है। वायरस के शिकार वही लोग हो रहे हैं जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए वे वायरस की चपेट में अधिक आ रहे हैं।

बच्चों के खानपान व साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए तो इससे बचा जा सकता है। बच्चों को अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ले जाने से बचा जाना चाहिए।

सिविल अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दुबे बताते हैं कि हाई रिस्क जैसी स्थिति तो नहीं है लेकिन जो लोग बीमार हैं वे वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर वायरस तेजी से अटैक करता है और पीड़ित वायरस से ग्रसित हो जाता है।

जो लोग बीमार हैं या सांस के रोगी हैं उन्हें अपना विशेष खयाल रखना होगा क्योंकि म्यूटेट हो चुके वायरस से बचने का एकमात्र उपाय एहतियात है।
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जरूरी जानकारी यहां से लें

राजधानी के सरकारी अस्पतालों से टेमीफ्लू दवा मिलनी मुश्किल हो रही है। पीजीआई और केजीएमयू से जांच रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को दवा के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है लेकिन रैपिड रिस्पॉन्स टीम से दवा लेने की बात कहकर मरीजों को लौटाया जा रहा है।

तेलीबाग के रहने वाले एक युवक पीजीआई से जांच रिपोर्ट लेने के बाद दवा के लिए लोकबंधु पहुंचा तो डॉक्टरों ने उसे सिविल भेज दिया। सिविल के डॉक्टरों ने उसे कह कर लौटा दिया कि रैपिड रिस्पॉन्स टीम घर पर जाकर दवा  देगी।

इमरजेंसी में यहां से लें मदद

सीएमओ कंट्रोल रूम- 0522-2622080
सीएमओ कंट्रोल मो.-  07839700132
स्वास्थ्य विभाग -  18001805145

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