लंबे समय से विवादों की वजह से रिलीज से रुकी हुई हिंदी फिल्म पदमावत (पहले पदमावती) के खिलाफ दायर याचिका में दिए निर्देशों के अनुसार उचित निर्णय नही लेने पर सेंसर बोर्ड चेयरमैन प्रसून जोशी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अवमानना मामले में नोटिस भेजा है।
उन्हें तीन हफ्ते में जवाब देना होगा, जिसमें वे अपना पक्ष रखेंगे। याचिका में कहा गया था कि संजय लीला भंसाली की यह फिल्म सती प्रथा को महिमामंडित करती है, ऐसा करना प्रतिबंधित है।
इस मामले में पूर्व में कामता प्रसाद सिंहल ने याचिका दायर की थी, जिसमें उनका कहना था कि रानी पदमिनी की कहानी सती प्रथा को बढ़ावा देती है। मध्यकाल की यह कहानी मलिक मोहम्मद जायसी की लिखे ग्रंथ पदमावत पर आधारित है, जिसके अंत में रानी पदमिनी सती होती हैं।
सती प्रथा पर भारत में कानूनन रोक है। प्रथा के किसी भी तरह के महिमामंडन को भी ‘सती प्रथा निवारण अधिनियम’ बनाकर रोक लगाई जा चुकी है, इसे दंडनीय अपराध बनाया गया है।
याचिका पर हाईकोर्ट ने याची को सिनेमेटोग्राफी एक्ट के तहत बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन, मुंबई द्वारा इस फिल्म को पास करने के निर्णय के खिलाफ बोर्ड के पास ही अपील करने की छूट दी थी। इस पर बोर्ड को तीन हफ्ते में निर्णय लेने के लिए कहा गया था।
याची का कहना है कि उन्होंने सेंसर बोर्ड के समक्ष 13 नवंबर 2017 को ही मामला रख दिया था, लेकिन कोई निर्णय बोर्ड चेयरमैन प्रसून जोशी ने नहीं लिया। ऐसे में याची ने यह अवमानना याचिका दायर की है।