माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। लखनऊ विवि में जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह और छात्रा के बीच हुई वार्ता का ऑडियो वायरल होने के बाद विवि परिसर से लेकर बाहर तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की माने तो आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह इकलौते ऐसा शिक्षक नहीं है जो छात्रा को प्रलोभन देकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले भी कई मामले विद्यार्थियों के बीच सुर्खियों में रहे हैं लेकिन बदनामी के डर से छात्राएं शिकायत करने से हिचकती हैं।
इस मामले के बाद कई पुराने मामले भी चर्चा में आ रहे हैं। कुछ पूर्व छात्राओं ने तो सोशल मीडिया पर भी पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए बिना किसी के नाम का जिक्र करते हुए अपनी भड़ास निकाली है।
कुछ समय पहले एमएससी की छात्रा के साथ भी एक शिक्षक ने काफी समय तक उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया। इंटरनल में अंक कम देने तक की धमकी दी गई थी। छात्रा किसी तरह से शिक्षक के चंगुल से छूटी। सोशल मीडिया पर एक पूर्व छात्रा ने पुराना वाकया साझा करते हुए बताया कि विवि के एक शिक्षक ने उनकी एक सहेली को बहुत परेशान किया। नोट्स देने के बहाने पार्किंग में अपनी कार तक बुलाया। जब वह छात्रा वहां पहुंची तो कहा कि नोट्स घर पर भूल आया हूं, तुम मेरे साथ घर चलो। छात्रा ने किसी तरह वहां से निकलकर पीछा छुड़ाया।
जंतु विज्ञान विभाग के ही एक अन्य शिक्षक पर भी एक छात्रा ने अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया था लेकिन फिर वह मामला रफा-दफा कर दिया गया। डॉ. परमजीत का मामला प्रकाश में आने के बाद ऐसे अनगिनत मामले फिर से चर्चा का विषय बन गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि विवि में छात्राओं के उत्पीड़न को रोकने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कुछ छात्राओं को शक्तिदूत बनाए जाने जैसी कवायदें धरातल पर कैसे उतरेंगी।
g पहली बार हुई इतनी जल्दी कार्रवाई : लविवि के इतिहास में किसी ऐसे मामले को लेकर इतनी त्वरित कार्रवाई शायद ही कभी हुई हो। इस मामले में विवि की ओर से न सिर्फ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई बल्कि जांच आईसीसी को सौंपी गई। कुलपति के निर्देश पर 24 घंटे में ही आईसीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट दे दी। इसके बाद ही कार्यपरिषद की आकस्मिक बैठक भी सोमवार को बुला ली गई। सोमवार को इस मामले में कुलपति की मौजूदगी में फैसला सुनाया जाएगा।
गिरफ्तारी पर गांव वाले हैरान
बिजनौर के गांव रतनपुर खुर्द निवासी आरोपी प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव वाले हैरान हैं। गांव वालों का कहना है कि परमजीत सिंह बेहद व्यावहारिक है। पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ। गांव वालों ने बताया कि पिछले कई सालों से डॉ. परमजीत परिवार के संग लखनऊ में ही रह रहा है। गांव में कभी कभी ही आना होता था। उसका व्यवहार अच्छा था। करीब 20 दिन पहले रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए परमजीत स्योहारा आया था। (इनपुट ः िबजनौर)
g शादीशुदा है आरोपी डॉ. परमजीत, 2022-23 में मिली थी विवि में नियुक्ति : जंतु विज्ञान विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह शादीशुदा है। उसके बच्चे भी हैं। आरोपी को लखनऊ विवि में कुलपति आलोक राय के समय में वर्ष 2022-23 में नियुक्ति मिली थी। रुहेलखंड विवि से 2007 में एमएससी किया, 2019-21 तक सीएसआईटी-आईआईटीआर लखनऊ में रिसर्च एसोसिएट भी रहा।
g वर्ष 2019 में वायरल ऑडियो के मामले में सभी हो गए थे बरी ः लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रा के साथ पेपर लीक करने की बातचीत का ऑडियो वर्ष 2019 में भी वायरल हुआ था। अंतर इतना था कि उस समय विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पद पर तैनात अधिकारी और एक कॉलेज की छात्रा जो कि एक बड़े अस्पताल में ऊंचे ओहदे पर थीं, से जुड़ा हुआ था। प्रदेश सरकार ने मामले की एसटीएफ से जांच भी कराई थी, लेकिन जांच में किसी को दोषी नहीं करार दिया गया। वायरल ऑडियो में कथित रूप से छात्रा के साथ विधि संकाय के कुछ शिक्षकों की बातचीत भी थी। हालांकि शिक्षकों ने इसे नकारते हुए ऑडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग की थी। इसके बाद ऑडियो की जांच नहीं हो सकी और सभी शिक्षकों को दोषमुक्त पाया गया। इस बार मामला पहले से ज्यादा गंभीर है क्योंकि वायरल ऑडियो में शिक्षक सीधे तौर पर छात्रा को पेपर लीक का लालच देता नजर आ रहा है।
g विश्वविद्यालय प्रशासन ने बदल दिए पेपर : लविवि प्रशासन इस मामले के बाद जूलॉजी विषय में आने वाले पेपर बदल दिए हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर का पेपर लीक करने का दावा सही नहीं है। शिक्षक असिस्टेंट प्रोफेसर है। सम सेमेस्टर की परीक्षा बहुविकल्पीय सवाल पर आधारित होती है। इसमें एक शिक्षक को अधिकतम 10 सवाल बनाने होते हैं। इसके बाद प्रोफेसर स्तर के शिक्षक प्रश्नपत्र मॉडरेट करते हैं। कौन से सवाल रखने या हटाने हैं, यह भी उसी समय तय हो जाता है। इसका मतलब असिस्टेंट प्रोफेसर को पता नहीं हो सकता कि पेपर में कौन से सवाल हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए यह कदम उठाया है।