श्रावस्ती। राप्ती नदी की कछार में बसे लक्ष्मनपुर गंगापुर से निकला नूरी बाबा पहले कबाड़ी फिर मौलाना और बाद में मदरसा संचालक बन गया। इतना ही नहीं, दीनी तालीम और झांड़-फूंक की आड़ में यौन शोषण के भी आरोप लगे। गिरफ्तारी से बचने के लिए निकाह कर लिया। चर्चा है कि जाली नोट ही नहीं, बल्कि मदरसे के विदेशी फंडिंग ने भी नूरी बाबा को रातोंरात अमीर बना दिया। मल्हीपुर क्षेत्र के लक्ष्मनपुर गंगापुर में मौजूद आवासीय मदरसा दारुल उलूम फैजुर्रनबी आज देश-प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे सुर्खियों में लाने वाला असगर अली का तीसरा बेटा मुबारक अली उर्फ नूरी बाबा की कहानी पूरी फिल्मी है।
बचपन से जानने वाले उसके एक साथी ने बताया कि नूरी शुरू से ही करोड़पति बनने की सोच रखता था। इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता था। मदरसा तो बस बहाना था। उसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग जुटाकर मालामाल होना था। इसी पैसे से उसने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर दी। पैसा कमाने की चाह ने ही उसे जाली नोटों का सौदागर बना दिया।