मायावती सरकार के बहुचर्चित नोएडा फार्म हाउस घोटाले के शिकायतकर्ता ही अब साक्ष्य मुहैया कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
लोकायुक्त द्वारा की जा रही इस मामले की जांच अंतिम दौर में है।
सरकार को रिपोर्ट भेजने से पहले लोकायुक्त ने शिकायकर्ताओं को नोटिस जारी करके घोटाले से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है ताकि जांच में कोई बिंदु रह गया है तो उसे भी शामिल किया जा सके।
लेकिन, शिकायतकर्ता चुप्पी साधे बैठे हैं। संभावना है कि लोकायुक्त इस महीने के अंत तक सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं।
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कायदे-कानून ताक पर रखकर अपात्र लोगों को आवंटित किए गए फार्म हाउसों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।
लोकायुक्त ने इस घोटाले की जांच लगभग पूरी कर ली है और अब सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।
जांच में कुछ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों द्वारा फार्म हाउस के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए जाने का खुलासा हुआ है तो कुछ रसूखदारों ने दूसरे लोगों के नाम आवंटन कराया है।
मायावती शासनकाल में भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर नोएडा फार्म हाउस आवंटन में 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था।
सरकार को अपनी जांच रिपोर्ट और सिफारिशें भेजने से पहले लोकायुक्त ने मई 2011 में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने वाले भाजपा के कुछ तत्कालीन बड़े नेताओं को नोटिस भेजकर 16 अक्तूबर तक हलफनामे के साथ घोटाले से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा था।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने माना कि इस मामले की शिकायत करने वाले भाजपा के कुछ नेताओं को नोटिस जारी कर साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया था, लेकिन किसी का जवाब नहीं आया।
लोकायुक्त का कहना है कि मामले की जांच लगभग पूरी कर ली गई है। जल्द ही सरकार को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
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