नोएडा अथॉरिटी को आला अफसरों की बीवियां चला रही थीं। पति की काली कमाई और घपलेबाजी में इन सबने पूरा साथ दिया और महज कुछ सालों में कंपनियों का पूरा साम्राज्य खड़ा कर दिया।
आयकर विभाग अब तक अफसरों की बीवियों के डायरेक्टर वाली 67 कंपनियों को बेनकाब कर चुका है। इनमें से 27 कंपनियों का भंडाफोड़ ढाई साल पहले चार आला अफसरों के ठिकानों पर मारे गए छापे में हुआ था। उस दौरान सामने आया था कि ये कंपनियां तीन अफसरों की पत्नियां चला रही थीं। फिर भी केंद्रीय जांच एजेंसियों ने पुख्ता कार्रवाई नहीं की।
नोएडा अथॉरिटी के अफसरों की बीवियों का कंपनी प्रेम 11 मई 2012 को उस समय सामने आया था जब नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस-वे डेवलपमेंट अथॉरिटी के महाप्रबंधक (प्रॉपर्टी) रवींद्र सिंह टोंगर, महाप्रबंधक (वित्त) ललित विक्रम, सीनियर अकाउंट ऑफिसर रामपाल वर्मन और महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) एसएसए रिजवी के आवास और कार्यालय पर छापा पड़ा।
इनमें एसएसए रिजवी को छोड़कर सभी अफसरों की पत्नियों की कंपनियों का खुलासा हुआ था। हालांकि रिजवी के निवेश के साक्ष्य कस्पनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में पाए गए थे।
तब यादव सिंह को किसने बचाया था छापे से
कुसुमलता के नेतृत्व वाली 40 कंपनियां भी साल 2012 की बताई जा रही हैं। इन कंपनियों को करीब 300 प्लॉट जिनकी कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रवींद्र, ललित, रामपाल और रिजवी के 34 ठिकानों पर देशव्यापी छापामारी के बावजूद उस समय कैसे यादव सिंह बच निकला था।
उसे जानबूझकर छोड़ दिया गया था या फिर यह महज आयकर विभाग की चूक थी। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि अभी और भी अफसरों की बीवियों की कंपनियों का जांच में खुलासा हो सकता है।
तत्कालीन आयकर महानिदेशक (जांच) एसएस बाजपेयी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि चारों अफसरों ने एक अरब की काली कमाई को स्वीकार करते हुए दस्तावेज सरेंडर कर दिए हैं। लेकिन आयकर विभाग ने बाद में यह नहीं बताया कि इन अफसरों से आयकर चोरी एवं पेनाल्टी के रूप में कितनी रकम जमा कराई गई।
जानिए, इन मेमसाबों का चला साम्रज्य
कुसुमलता : यादव सिंह पत्नी कुसुमलता मीनू क्रिएशन सहित करीब 40 कंपनियों की डायरेक्टर। इन कंपनियों को नोएडा अथॉरिटी ने जो प्लॉट अलॉट किए उनको मुंहमांगी रकम पर बिल्डरों को मय कंपनियों को बेच दिया गया।
कुशल सिंह : टोंगर की पत्नी कुशल सिंह ग्रेटर नोएडा हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेसर्स लीजियंट फार्मा, तनवीर इलेक्ट्रो, आधार शिला बिल्डकॉन, मेसर्स क्रेस्ट प्रमोटर, दादरी कास्ट मेटल समेत 24 कंपनियों की डायरेक्टर थी।
अल्का विक्रम : ललित की पत्नी अल्का विक्रम दो कंपनियों की डायरेक्टर थीं। यह कंपनियां उन्नति इंफ्रोटेक और उन्नति साफ्टवेयर हैं। विक्रम की पत्नी वाली इस कंपनी में करोड़ों रुपये के निवेश के दस्तावेज जब्त हुए थे।
स्वदेश वर्मन : वर्मन की पत्नी स्वदेश वर्मन कुसुम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की डायरेक्टर थीं। वर्मन की बहन कुसुम सुरजीत भी कई कंपनी में डायरेक्टर रह चुकी है। उसने करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कराए जिसके साक्ष्य भी छापे में मिले थे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को यहां कहा कि यादव सिंह के मामले की जांच ईडी व आयकर विभाग कर रहे हैं। ये संस्थाएं सरकार से बड़ी हैं। इनका इनपुट मिलने के बाद सरकार भी कार्रवाई करेगी। पहले भी इस तरह के मामलों में नियम-कानून के अनुसार कार्रवाई की गई है।