संस्थान के कुछ चिकित्सकों ने विरोध जताते हुए बैकलॉग भरने की मांग की है। उन्होंने निदेशक सहित अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजा है। मांग की है कि पहले से कार्यरत संकाय सदस्यों और नई भर्ती के पदों को मिलाकर कुल 389 पद के सापेक्ष आरक्षण का निर्धारण किया जाए, क्योंकि अब अगले 10 से 20 साल के बीच संस्थान में कोई नई भर्ती होने की संभावना नहीं है।
नियमानुसार किए आकलन
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान का कहना है कि नई भर्ती के लिए निकाले गए 165 पदों में 83 आरक्षित श्रेणी के रखे गए हैं। भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। पुरानी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। नई भर्ती में सभी आकलन नियम के अनुसार किए गए हैं।