आठवीं तक के विद्यार्थियों को वजीफा न देने के फैसले से साफ हो गया है कि राज्य सरकार अपने बूते छात्रवृत्ति योजना चलाने की स्थिति में नहीं है। सिर्फ इन्हीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिना केंद्रीय मदद के छात्रवृत्ति दी जा रही थी।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि आठवीं तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति न दिए जाने के फैसले से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटना तय है। अलबत्ता केंद्र सरकार ने कक्षा 9-10 के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त रकम मुहैया करा दी है।
पूर्व दशम छात्रवृत्ति योजना में पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की नियमावली में मदद देने का प्रावधान किया गया है। इसमें कक्षा 1-10 तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि कक्षा 1-10 तक के लिए 30-32 करोड़ रुपये ही केंद्र सरकार से मिलते रहे हैं।
इस राशि से कक्षा 9-10 के करीब पचास फीसदी पिछड़े छात्रों को ही वजीफा मिल पाता है। इस तरह से देखें तो कक्षा एक से आठ तक की छात्रवृत्ति योजना पूरी तरह से राज्य के ही संसाधनों पर ही निर्भर है।
यहां बता दें कि कक्षा 9 और 10 के अनुसूचित जाति के सभी छात्र-छात्राओं के लिए केंद्र सरकार ही छात्रवृत्ति देती है।