सरकार ने 12 हजार शिक्षण संस्थानों के छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति न करने फैसला किया है। पिछले साल योजना का लाभ लेने वाले करीब 11 लाख छात्रों के इस बार गायब होने की वजह न बताने पर यह कदम उठाया गया है।
माना जा रहा है कि राशि हड़पने की पोल खुलने के डर से इन संस्थानों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब इन संस्थानों के खिलाफ जांच भी कराई जाएगी।
सूबे में 18 लाख 87 हजार 666 छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने इस साल नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया। जबकि पिछले साल उन्होंने छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ लिया था।
शासन ने इन छात्रों के बारे में संबंधित संस्थानों से छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर ऑनलाइन जानकारी मांगी थी। इसमें यह बताना था कि इस साल ये छात्र कहां हैं। जवाब के लिए शिक्षण संस्थानों को पहले 30 नवंबर और फिर 10 दिसंबर तक का समय दिया गया। लेकिन अंतिम तारीख तक महज 7 लाख 76 हजार 468 छात्रों के मामले में ही शिक्षण संस्थानों ने जवाब दिया और 11 लाख 11 हजार 198 छात्रों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।