किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू में सिक्योरिटी गार्डों की जेब काटकर एजेंसी संचालक और अधिकारी अपनी जेब भर रहे हैं।
बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे सिक्योरिटी गार्डों को जो आधा-अधूरा वेतन दिया जा रहा है, उसे भी एजेंसी संचालक हड़पने से बाज नहीं आ रहे हैं।
मंगलवार को मिश्रा सिक्योरिटी के सुरक्षाकर्मियों की डेढ़ घंटे की हड़ताल के पीछे यही तथ्य सामने निकल कर आए हैं।
वेतन के नाम पर उन्हें जब एक-एक हजार रुपये पकड़ाए गए, तो उनका गुस्सा कार्य बहिष्कार के रूप में सामने आया। इसका सीधा नुकसान मरीजों ने भुगता। वहीं, इस प्रकरण में केजीएमयू के कमीशनखोर अधिकारियों ने आंखें मूंदी रखी हैं।
है एजेंसी और अफसरों की सांठगांठ
सूत्रों के अनुसार, केजीएमयू में मिश्रा सिक्योरिटी एजेंसी, इस्पाक सिक्योरिटी, केके मैनपॉवर, इलेशन सॉ टनेट, अरुणोदय सिक्योरिटी एजेंसी, स्पार्टा सिक्योरिटी एजेंसी ठेके पर कर्मचारियों की आपूर्ति करती हैं।
इनमें से स्पाक और मिश्रा एक दशक से भी अधिक समय से केजीएमयू में हजारों कर्मचारियों की आपूर्ति कर रहे है। ये दोनों सिक्योरिटी एजेंसियां अधिकारियों की मिलीभगत से सुरक्षाकर्मियों का करोड़ों रुपये हजम कर चुकी हैं।
पैरवी पर जुड़ती गईं एजेंसियां
दो सालों में इस धंधे में कई और एजेंसियों का नाम जुड़ गया है। सिक्योरिटी गार्डों ने बताया कि किसी न किसी अधिकारी की पैरवी पर एजेंसियों को काम मिला।
करोड़ों रुपये गए कमीशन में
इसके बाद सबने मिल बांट कर करोड़ों रुपये कमीशनखोरी में कमाए। 3200 रुपये पाने वाले सुरक्षाकर्मियों को 3600 रुपये महीना देने की कवायद हुई।
बावजूद केजीएमयू से मिलने वाले प्रति सुरक्षाकर्मी के भुगतान का दो हजार रुपये अब भी एजेंसियों और अधिकारियों की जेब में जा रहा हैं।