किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की शनिवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में
उच्चाधिकारियों को लेने के देने पड़ गए।
एसपीएम विभाग के एक शिक्षक को जांच
से राहत देने के लिए बुलाई गई कार्यपरिषद ने उल्टे केजीएमयू के अधिकारियों
को ही फटकार लगा दी। साथ ही शिक्षक द्वारा अनुभव प्रमाण पत्रों में की गई
गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए। प्रोन्नति
संबंधित निर्णयों को सुरक्षित रखने को कहा।
केजीएमयू
प्रशासन ने शनिवार को कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई थी। बताया जा रहा है
कि इसमें एसपीएम विभाग के शिक्षक सहित लगभग आधा दर्जन फैसलों पर कार्य
परिषद की मुहर लगवाना था।
हालांकि केजीएमयू प्रशासन इसमें सफल नहीं हो
पाया। कार्यपरिषद ने उनकी सोच के विपरीत फैसला करते हुए शिक्षक को राहत
देने से इन्कार कर दिया। कार्यपरिषद के अधिकतर सदस्यों का कहना था कि 3
अगस्त को हुई बैठक में इस मामले की जांच के आदेश दिए थे।
20 दिन के अंदर
ऐसा क्या हो गया कि शिक्षक को जांच से राहत देने का फैसला लिया जा रहा है।
इसके बाद परिषद के सदस्यों ने जांच कमेटी का गठन कर उसमें जिला प्रशासन का
भी एक अधिकारी शामिल करने को कहा।
इसके बाद हाल में चयनित फैकल्टी और डीन
डेंटल डॉ. प्रदीप टंडन की तैनाती का मामला रखा गया। इस पर कार्यपरिषद ने
अपनी मुहर लगा दी। इसके अलावा आर्थोपैडिक विभाग में प्रोन्नति का प्रकरण भी
इस बार नहीं सुलझाया जा सका। इसे अगली बैठक के लिए टाल दिया गया।
उधर
केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने आपात कार्य परिषद की बैठक बुलाकर एसपीएम
विभाग के शिक्षक के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच से राहत देने और किसी एक
व्यक्ति को अनुचित लाभ देने का विरोध किया है।
एसोसिएशन के महासचिव डॉ.
नईम अहमद ने कहा कि केजीएमयू प्रशासन इस प्रकरण में एक शिक्षक को अनुचित
लाभ दिलाने के लिए नियमों की अनदेखी कर रहा है।
नियमानुसार कार्य परिषद की
एक बैठक में लिए गए फैसले को छह माह से पहले बदला नहीं जा सकता है।
कार्यपरिषद केसदस्यों ने केजीएमयू प्रशासन की गलत मंशा पर पानी फेर दिया
है। इसका टीचर्स एसोसिएशन स्वागत करता है।