प्रदेश में शीघ्र ही दर्जाधारी मंत्रियों की लाल बत्ती छिन जाएगी। सरकार इसके लिए जल्द ही नियमों में संशोधन करने जा रही है।
इस संशोधन के बाद दर्जाधारी मंत्रियों को लाल बत्ती लगाने का अधिकार खत्म हो जाएगा।
सरकार यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले दिनों लाल-नीली बत्ती के संदर्भ में दिए गए सख्त निर्देशों के बाद करने जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ही लाल बत्ती देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस रवैये को देख प्रदेश सरकार ने भी अपने यहां लाल बत्तियों में कटौती करने का मन बना लिया है।
हालांकि प्रदेश सरकार ने फिलहाल दर्जाधारी मंत्रियों की ही लाल बत्ती गुल करने का इरादा बनाया है। बाकी पदों पर बैठे लोगों की लाल बत्ती फिलहाल सुरक्षित रहेगी यानी वे इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
दरअसल, लाल बत्ती का पूरा खेल रुतबे से जुड़ा हुआ है। सियासत में इसी रुतबे से सब कुछ हासिल होता है। वोटरों को लुभाना हो या फिर क्षेत्र में धाक जमानी, सभी में लाल बत्ती काम आती है।
नेताओं के पास लंबी गाड़ियां तो हैं लेकिन उनकी सारी ऊर्जा लालबत्ती लगी सरकारी गाड़ी पाने के लिए लगती है। सपा सरकार ने भी अपने नेताओं को संतुष्ट करने के लिए विभिन्न संस्थानों में सलाहकार, अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाकर लाल बत्ती दे दी है।
अब यही लाल बत्ती सरकार के लिए मुसीबत बन गई है। इनकी संख्या कम करना सरकार के लिए चुनौती बन गई है। इसलिए सरकार अब बीच का रास्ता निकाल रही है।
केवल दर्जाधारी मंत्रियों से ही लाल बत्ती लगाने का अधिकार वापस लिया जाएगा। बाकी किसी की भी लाल बत्ती सरकार फिलहाल उतरवाने के मूड में नही है।
प्रमुख सचिव व सचिव को भी नहीं मिलेगी नीली बत्ती
प्रमुख सचिव व सचिव भी लखनऊ सीमा में अपनी गाड़ियों में नीली बत्ती नहीं लगा सकते हैं। इनके साथ ही पुलिस महानिदेशक व अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी भी लखनऊ में नीली बत्ती नहीं लगा सकते हैं।
यह अधिकारी जब शासकीय यात्रा पर लखनऊ नगर निगम की सीमा के बाहर जाएंगे तभी वे नीली बत्ती का प्रयोग कर सकते हैं। इसी तरह अपर महाधिवक्ता भी लखनऊ के बाहर शासकीय दौरे पर ही लाल बत्ती का प्रयोग कर सकते हैं।
यह लगा सकते हैं बत्तियां
लाल बत्ती व फ्लैशर: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, विधान परिषद के सभापति, विधानसभा के अध्यक्ष, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायमूर्ति, लोकायुक्त, कैबिनेट मंत्री, दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री, नेता विरोध दल (विधान परिषद व विधानसभा), उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायाधीश व सेवानिवृत्त न्यायाधीश जो पूर्णकालिक रूप से पुनर्नियोजित हों, महाधिवक्ता, अध्यक्ष मानव अधिकार आयोग व सदस्य मानव अधिकार आयोग
बिना फ्लैशर के लाल बत्ती: विधान परिषद के उपसभापति, विधान सभा के उपाध्यक्ष, राज्यमंत्री व उपमंत्री, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री, दर्जा प्राप्त उपमंत्री, मंत्रिमंडलीय सचिव, मुख्य सचिव, अध्यक्ष राजस्व परिषद, पुलिस महानिदेशक, राज्य निर्वाचन आयुक्त, अध्यक्ष लोक सेवा आयोग, जिला न्यायाधीश व उनके समकक्ष उच्चतर न्यायिक सेवा के अन्य अधिकारी, राज्यसभा एवं लोकसभा के सदस्य।