केजीएमयू के लिंब सेंटर में मरीजों को बिना एक्स-रे कराए ही लौटना पड़ रहा है। ये दिक्कत एक दिन में सिर्फ 60 मरीजों का ही एक्स-रे किए जाने के तुगलकी फरमान से आई है।
लिंब सेंटर में ऑर्थोपैडिक, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन और रुमेटोलॉजी विभाग है। एक दिन में 600 से अधिक मरीज तीनों विभागों की ओपीडी में आते हैं। इनमें से 100 से अधिक का एक्स-रे डॉक्टर लिखते हैं लेकिन एक ही मशीन होने कारण सिर्फ 60 मरीजों की ही जांच हो रही है। बाकी को वापस भेजा जा रहा है।
केजीएमयू में लिंब सेंटर में पहले फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन विभाग था। इसके बाद वहां रुमेटोलॉजी (गठिया) रोग विभाग भी खुल गया। कुछ साल पहले वहां केजीएमयू परिसर से आर्थोपैडिक सर्जरी विभाग भी शिफ्ट कर दिया गया।
विभाग वहां तीन-तीन खुल गए लेकिन वहां एक्स-रे मशीन और टेक्नीशियन की संख्या नहीं बढ़ाई गई। जबकि डीपीएमआर, ऑर्थोपैडिक और गठिया रोग विभाग तीनों में ही अधिकतर मरीजों का एक्स-रे कराया जाता है। गठिया रोग विभाग में तो एक ही मरीज का तीन से पांच एक्स-रे कराया जाता है।
इसके चलते वहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इंदिरा नगर से आए एक मरीज ने बताया कि वो ओपीडी में मरीज को दिखाने के बाद 12 बजे लिंब सेंटर के पंजीकरण काउंटर पर एक्स-रे जांच का शुल्क जमा करने पहुंचा लेकिन वहां उसे बताया गया कि 60 मरीज से ज्यादा का शुल्क नहीं जमा किया जाता है। मरीज के परिवारीजनों ने जब आपत्ति जताई तो वहां उसे बदसलूकी भी की गई।