फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रधानाचार्य बने बीएसए, छात्रों की पढ़ाई पर संकट

Sun, 27 Apr 2014 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़ाने की जिम्मेदारी लेने वाले ही जब खिसक जाएं तो स्कूलों का भगवान ही मालिक है। प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों का ऐसा ही हाल है।
विज्ञापन


इन कॉलेजों के लिए चयनित हुए अधिकतर प्रधानाचार्य बेसिक शिक्षा अधिकारी बनकर जिलों में मजे मार रहे हैं और इनमें पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
विज्ञापन


प्रदेश में मौजूदा समय में 567 इंटर कॉलेज हैं, जिसमें अधिकांश कार्यवाहक प्रधानाचार्य के सहारे चल रहे हैं।

राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों के 50 फीसदी पदों पर लोकसेवा आयोग से चयन होता है और 50 फीसदी पदों को पदोन्नति से भरा जाता है।

इन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ता व जिलों में एसोसिएट डीआईओएस के पद पर तैनाती दी जा सकती है।
विज्ञापन


प्रधानाचार्य बनने वाले का शुद्ध काम बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना होता है।

डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता का काम बीटीसी का प्रशिक्षण देना होता है, जबकि बीएसए व एसोसिएट डीआईआएस के पद पर तैनाती पाने वाले मजे मारते हैं।

इसलिए आयोग से चयनित होने वाले काफी संख्या में प्रधानाचार्य जुगाड़ के सहारे बीएसए या फिर प्रभारी डीआईओएस बने हुए हैं।

इसके चलते राजकीय इंटर कॉलेजों की पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें