सर्व शिक्षा अभियान को रफ्तार देने के लिए संविदा पर रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटरों और सहायक लेखाकारों को तीन से चार महीने बाद मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में इनके लिए परिवार का खर्च चलाना मुहाल हो गया है।
खंड शिक्षा अधिकारियों से कहने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत बेसिक शिक्षा के कामों को करने के लिए प्रदेश में 880 डाटा एंट्री ऑपरेटर, 880 सहायक लेखाकार, 1787 इंटिनरेट टीचर (विशेष शिक्षक) 63 और फिजियोथेरेपिस्ट रखे गए हैं।
बेसिक शिक्षाधिकारी जिम्मेदार
जिलेवार इन कर्मियों को कार्यदायी संस्था के माध्यम से रखा गया है। डाटा एंट्री ऑपरेटर और सहायक लेखाकार ब्लॉकों के सारे काम निपटाते हैं। इनके सहारे ब्लॉक संसाधन केंद्रों की कार्यप्रणाली चल रही है।
बेसिक शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही से इन्हें समय से वेतन नहीं मिल पाता।
कंप्यूटर ऑपरेटरों और सहायक लेखाकारों ने सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय को शिकायती पत्र भेजकर मानदेय का नियमित भुगतान कराने की गुहार लगाई है।
अनिवार्य शिक्षा के लिए शुरू हुआ
गौरतलब है कि सर्व शिक्षा अभियान की शुरूआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी।
वहीं 2010 में भारत सरकार ने 6 से 14 साल के सभी बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य कर दी थी।
सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के अनुसार उन बस्तियों में नए स्कूल बनाने का प्रयास किया जाता है जहां स्कूली शिक्षा की सुविधा नहीं है और अतिरिक्त कक्षा, शौचालय, पीने का पानी, रखरखाव अनुदान और स्कूल सुधार अनुदान के माध्यम से मौजूदा स्कूलों की बुनियादी ढांचे में विकास करना है।