लखनऊ। छावनी में जनवरी 2020 में सदस्यों का चुनाव होना प्रस्तावित है। इसके मद्देनजर मंगलवार को छावनी बोर्ड की बैठक में परिसीमन का प्रस्ताव लाया गया पर निर्वाचित सदस्यों के विरोध के चलते पास नहीं हो सका। इससे अब छावनी में परिसीमन नहीं होगा। वहीं सेना और छावनी की जमीन पर अवैध रूप से रहने वाले मतदाताओं का वोट कट सकता है। यानी छावनी के आधे मतदाता खतरे में हैं।
छावनी बोर्ड ने मंगलवार को विशेष रूप से बैठक का आयोजन अध्यक्ष मेजर जनरल प्रवेश पुरी की अगुवाई में किया था। इसमें छावनी क्षेत्र का चुनाव से पहले परिसीमन करने का प्रस्ताव पेश हुआ, लेकिन निर्वाचित सदस्यों ने इस परिसीमन का विरोध शुरू कर दिया। इससे यह प्रस्ताव अटक गया। बैठक में बोर्ड ने न्यायालय के आदेश पर सेना एवं छावनी की जमीन पर अवैध रूप से निवास करने वाले उन मतदाताओं का वोट खत्म करने का प्र्रस्ताव पेश किया जो झोपड़-पट्टी एवं नाले के किनारे रह रहे हैं और उनका लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में नाम दर्ज है। बोर्ड के इस प्रस्ताव का सदस्य प्रमोद शर्मा ने यह कहते हुए विरोध किया कि जो मतदाता लोकसभा व विधानसभा के चुनाव में मतदान कर चुके हैं, उनसे छावनी क्षेत्र के चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं छीना जा सकता है। इस विरोध के चलते बोर्ड ने इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय को भेजने का आश्वासन दिया और कहा कि जो निर्णय होगा, उसको मानना पड़ेगा।