शासन के रुख के बाद रविवार को एसएसपी प्रवीण कुमार ने 49 रसूखदारों के गनर छीन लिए। इसमें ज्यादातर सरकार के करीबी,पार्टी पदाधिकारी,ब्लॉक प्रमुख,पार्षद बताए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि करीब 150 अन्य रसूखदारों की सूची बनाई जा रही है जिनसे सुरक्षा वापस लेनी है।
गनर के दुरुपयोग का मुद्दा हमेशा से सुर्खियों में रहा है। बीते माह एक पीआईएल पर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने इस पर सख्ती की थी। एसएसपी ने आपराधिक मामलों में वांछित नेताओं और ठेकेदारों सहित आठ लोगों की सुरक्षा वापस ले ली थी।
बीते शनिवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी रसूखदारों से गनर वापस लेने के आदेश दिए थे। इसके बाद एसएसपी ने गनर लेने वालों की सूची निकलवाई तो कुल 92 नाम सामने आए। इसमें से 49 ऐसे लोग चिह्नित किए गए जिन्हें सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं थी।
रविवार को इन सभी 49 लोगों के गनर वापस ले लिए गए। इन सभी को नि:शुल्क गनर दिए गए थे। जानकारी के अनुसार दो-तीन दिन में कई अन्य लोगों के गनर भी वापस लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार राजधानी पुलिस ने करीब 500 गनर बांटे हैं।
ईकोर्ट की सख्ती के बाद मुख्य सचिव ने गनर वापस लेने के लिए सख्त आदेश दिए हैं। इसके बाद से रसूखदारों में हड़कंप मचा है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल,सीएम,मंत्री,सांसद,विधायक,श्रेणीबद्ध सुरक्षा प्राप्त वीआईपी के अलावा कई बार शासनादेश और कोर्ट के आदेश पर गनर दिए जाते हैं।
गनर का आदेश अब सीधे शासन से नहीं होगा
शासन के करीबी अब सीधे गनर का आदेश नहीं करा सकेंगे। बीती 14 मई को जारी शासनादेश के अनुसार गनर की व्यवस्था में कई फेरबदल किए गए हैं। शासनादेश के तहत डीएम,एसएसपी व एलआईयू के सीओ की जिला स्तरीय एक कमेटी गठित की गई है।
गनर के इच्छुक व्यक्ति को इस कमेटी के समक्ष आवेदन करना होगा। कमेटी अधिकतम तीन माह तक के लिए गनर दे सकती है। इसके बाद भी अगर संबंधित व्यक्ति को गनर चाहिए तो उसे कमिश्नर, एसपी इंटेलीजेंस और जोनर ऑफिसर इंटेलीजेंस की दूसरी कमेटी के समक्ष आवेदन करना होगा।
अगर यहां भी संबंधित व्यक्ति को गनर की आवश्यकता समझते हुए हरी झंडी दे दी जाती है तो तीन माह तक के लिए उसे फिर सुरक्षा मिल जाएगी। इन दोनों कमेटियों से सुरक्षा मिलने के बाद भविष्य में सुरक्षा के लिए उक्त व्यक्ति को शासन में आवेदन करना होगा।