सरकारी अनुदान के लिए मदरसा संचालकों को अभी और इंतजार करना होगा। अनुदान के लिए जिन मदरसों को छांटा गया था, उनमें भी कई में घपले सामने आए हैं।
इसे देखते हुए अधिकारियों ने भी राजनीतिक दबाव के बावजूद फिलहाल अनुदान की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।समाजवादी पार्टी ने सरकार बनाने के बाद प्रदेश के 150 मदरसों को अनुदानित करने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री की घोषणा जब वित्त विभाग में पहुंची तो उसने दो वित्तीय वर्ष में 150 मदरसों को अनुदान देना तय किया।
घोषणा के बाद दो वित्तीय वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी तक एक भी मदरसे को अनुदानित नहीं किया जा सका है।
शिक्षकों के चयन में भी गड़बड़ी
पिछले वित्तीय वर्ष (2013-14) में सरकार ने 75 मदरसों को अनुदान देने का निश्चय किया। इससे पहले सरकार ने मदरसों की जांच कराई। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय स्तर पर अनुदान के प्रस्तावों का परीक्षण किया गया।
इसमें कई मदरसे मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को 40-45 मदरसे ही ऐसे मिले जिन्हें अनुदान दिया जा सकता था, लेकिन अपने-अपने मदरसों को अनुदान सूची में शामिल कराने का राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता गया।
इस कारण अधिकारियों ने फिलहाल अनुदान देने की फाइल पर हस्ताक्षर करने से ही मना कर दिया है। दरअसल, मदरसों की जांच में कई तरह की घपलेबाजी मिली है।
एक मदरसे में तो पुराने संचालक को मृत दिखाकर कुछ लोगों ने नई प्रबंध समिति बना उसे पंजीकृत करा दिया। अब पुराने बुजुर्ग मदरसा संचालक अपने जीवित होने का प्रमाण देते फिर रहे हैं। कई मदरसों ने शिक्षकों के चयन में भी गड़बड़ियां कर रखी हैं।
छात्र संख्या भी फर्जी
कई मदरसा संचालकों ने पुराने शिक्षकों को हटाकर नए शिक्षक तैनात कर लिए हैं। कुछ ने तो अपने रिश्तेदारों को ही शिक्षक रख लिया है।
ऐसे में कई जगह निर्धारित योग्यता वाले शिक्षक ही नहीं हैं। कुछ मदरसों ने छात्र संख्या भी फर्जी दिखा रखी है। अभी प्रदेश में 459 मदरसे ऐसे हैं जिन्हें सरकार अनुदान देती है।
अनुदान के फायदे
अनुदान मिलने के बाद मदरसों को 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के अलावा प्रधानाचार्य व दो कर्मचारियों के पद स्वीकृत हो जाते हैं। इससे सरकार पर प्रति मदरसा करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आता है।
ये हैं अनुदान के लिए मानक
-मदरसे की प्रबंध समिति सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 में पंजीकृत होनी चाहिए।
-प्रबंध समिति रजिस्ट्रार, सोसायटीज, उत्तर प्रदेश द्वारा विवादग्रस्त घोषित न की गई हो।
-रजिस्ट्रार अरबी-फारसी परीक्षाएं, उत्तर प्रदेश द्वारा स्थायी मान्यता प्राप्त हो।
-मदरसे में छात्र संख्या 100 से कम न हो।
-आलिया की मान्यता प्राप्त प्रत्येक स्तर की कक्षा में 15 छात्र से कम न हों
-नियमानुसार निर्धारित योग्यता रखने वाले अध्यापक नियुक्त हों।
-अरबी-फारसी परीक्षाओं में शामिल छात्रों का परीक्षाफल 50 प्रतिशत से कम न हो।
-मदरसों का अपना निजी भवन और पर्याप्त शिक्षण कक्ष हों।