लखनऊ। जमीन अधिग्रहण के 65 साल बाद भी पूरा मुआवजा नहीं मिलने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि 22 अक्तूबर तक याची को पूरी बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया गया तो माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्वयं अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार शैलेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 1959 में पूरी हो गई थी, जबकि मुआवजे की वसूली के लिए 2019 से निष्पादन की कार्यवाही चल रही है। इसके बावजूद अब तक पूरा भुगतान नहीं हुआ।
याची की ओर से बताया गया कि उसे अब तक 11.72 लाख रुपये मिले हैं, जबकि अगस्त 2025 तक करीब 38.25 लाख रुपये बकाया थे। कोर्ट ने कहा कि मामले में कई न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया गया है। भुगतान न होने पर अपर मुख्य सचिव को यह भी बताना होगा कि याची को मुआवजे के अतिरिक्त भारी हर्जाना क्यों न दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्तूबर को होगी।