स्वाइन फ्लू को लेकर बनाए गए नोडल अस्पतालों में सॉल्यूशन किट का टोटा होने से डॉक्टर मरीजों को जांच की सलाह देने से ही बचने लगे हैं और काउंसलिंग पर अधिक जोर दिया जा रहा है। ...और ये सबकुछ ऐसे समय में हो रहा है जब रोजाना ही स्वाइन फ्लू के नए मरीज सामने आ रहे हैं।
नोडल अस्पतालों सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में सॉल्यूशन स्वाब कलेक्शन किट के संकट के चलते स्वाब कलेक्शन की व्यवस्था पटरी से उतर गई है।
बलरामपुर अस्पताल के एक अधिकारी बताते हैं कि चार दिन पहले 35 किट उपलब्ध कराई गई थी और उसी से काम चलाया जा रहा है। किट की आपूर्ति न होने के चलते केवल उन्हीं मरीजों के स्वाब का सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा है जिनमें स्वाइन फ्लू की आशंका अधिक है।
दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से सॉल्यूशन किट की सप्लाई होती है। अब पीजीआई और केजीएमयू को किट उपलब्ध नहीं हो पा रही है जिससे स्वाब कलेक्शन का काम पटरी से उतर गया है।
10 से 12 सैंपल ही भेजे जा रहे पीजीआई
सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल से औसतन रोजाना 40 सैंपल जांच के लिए पीजीआई भेजे जाते थे। अब ये आंकड़ा 10 से 12 रह गया है। जबकि तीनों नोडल अस्पतालों में रोजाना 120 से अधिक मरीज जांच या डॉक्टरी सलाह के लिए पहुंच रहे हैं।
ठप हो सकती है जांच
केजीएमयू और पीजीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाइन फ्लू की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली जांच किट की भी किल्लत होने लगी है।
केजीएमयू और पीजीआई सूत्रों की मानें तो अभी जैसे-तैसे काम किया जा रहा है लेकिन अस्पतालों को सख्त निर्देश दे दिया गया है कि वो कम से कम स्वाब जांच के लिए भेजें।
अगर रोजाना 60 से 70 लोगों के स्वाब का सैंपल जांच के लिए पीजीआई और केजीएमयू पहुंचेगा तो जांच की व्यवस्था कभी भी ठप हो सकती है।
जांच किट की पर्याप्त व्यवस्था
इस पर सीएएमओ डॉ. एसएनएस यादव का कहना है कि सर्दी-जुकाम के सभी मरीजों की जांच संभव नहीं है। जिनमें स्वाइन फ्लू का लक्षण दिखता है डॉक्टर उसी को जांच लिख रहे हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशालय के एपिडेमिक सेल में अलग से व्यवस्था कर ली गई है और वहां भी जांच संभव है। सॉल्यूशन और जांच किट की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। जांच नहीं रुकेगी।