सूत्रों के मुताबिक, संघ के शीर्ष नेतृत्व ने तय किया है कि फिलहाल कहीं कोई बड़ी जुटान न की जाए। प्रांत प्रचारकों की प्रांतीय स्तर पर हर साल होने वाली बैठकें भी न करके इन्हें विभाग (तीन-चार जिला) स्तर पर करने का फैसला किया गया है, जिससे संख्या काफी कम हो जाए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके।