लखनऊ में भी कई ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो बदमाशों से दोस्ती निभाते हैं या उनके लिए मुखबिरी करते हैं। अधिकारियों से इनका कच्चा चिट्ठा निकलवाया जा रहा है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि पूर्व में अपराधियों से मिलीभगत के आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की समीक्षा हो रही है। कमी मिले तो उसे पूरा कराया जाएगा।
खाकी और अपराधियों का सबसे घिनौना गठजोड़ दो फरवरी 2017 में तेल कारोबारी श्रवण साहू की हत्या में सामने आया था। श्रवण बेटे आयुष की हत्या के आरोपी हिस्ट्रीशीटर अकील को सजा दिलाने के लिए पैरवी कर रहे थे। वहीं, अकील ने तत्कालीन क्राइम ब्रांच के दरोगा धीरेंद्र शुक्ला और सिपाही अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव के साथ मिलकर उन्हें ही फर्जी मामले में फंसाने की साजिश रच डाली।
एसटीएफ ने इस साजिश का खुलासा किया था। श्रवण साहू के खिलाफ साजिश रचने में अकील के साथ 16 पुलिसकर्मियों का नाम सामने आया था। सभी को निलंबित किया गया था। बाद में दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, सिपाही अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई थी। तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद ने कहा था कि हमारे बीच के भेड़ियों को बेनकाब करना जरूरी है। हालांकि, बर्खास्त पुलिसकर्मियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई आज तक नहीं की जा सकी है।