लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की शिक्षक भर्ती स्थगित होने के बाद एनएमसी के मानक पूरे होने में भी समस्या हो सकती है। एनएमसी के मानक पूरे न होने की वजह से बीते साल स्टूडेंट्स की डिग्री फंस गई थी। विद्यार्थियों के धरना-प्रदर्शन पर अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद प्रमाणपत्र जारी हुआ था। शिक्षकों की भर्ती न होने पर दोबारा वही स्थिति आ सकती है।
लोहिया संस्थान के विभिन्न विभागों में शिक्षकों के करीब 300 नियमित पदों पर नियुक्ति होनी थी। इसके लिए शनिवार से साक्षात्कार शुरू होने थे। इस बीच हाईकोर्ट ने आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन न करने की वजह से भर्ती संबंधी विज्ञापन रद्द कर दिया। इसके बाद नए सिरे से भर्ती संबंधी विज्ञापन निकालना पड़ेगा।
दरअसल लोहिया संस्थान में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए दिसंबर 2023 में विज्ञापन निकाला गया था। इसमें आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन न करने का आरोप लग रहा था। आपत्ति के बाद निस्तारण न होने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। अब हाईकोर्ट ने आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन न होने की बात कहते हुए विज्ञापन रद्द कर दिया है। बीते साल एनएमसी ने एक साल के लिए मान्यता का प्रमाणपत्र जारी किया था। ऐसे में बिना शिक्षक भर्ती अगले साल के लिए प्रमाणपत्र जारी होना संभव नहीं दिखाई पड़ रहा है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की शर्तों के अनुसार सभी क्लीनिकल और सुपर स्पेशियलिटी विभाग में न्यूनतम एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर तथा एक असिस्टेंट प्रोफेसर होना अनिवार्य है। इन तीनों का उसी डिसिप्लिन का होना चाहिए जिसका वह विभाग हो। इसके बावजूद लोहिया संस्थान में इस समय कई ऐसे विभाग हैं, जहां निर्धारित संख्या में शिक्षक ही नहीं हैं। शिक्षक भर्ती का विज्ञापन रद्द होने से मानक पूरे होने की उम्मीद भी धूमिल हुई है। इस समय मेडिकल आंकोलॉजी, इंडोक्राइन, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, डेंटल, मानसिक, त्वचा, नेत्र समेत, गैस्ट्रो मेडिसिन, डर्मेटोलॉजी, डेंटिस्ट्री, मनोचिकित्सा, इंडोक्राइन सर्जरी, ऑप्थमॉलजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर मेडिसिन और रीप्रोडक्टिव मेडिसिन जैसे विभागों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।