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आरक्षण को लेकर निषादों ने किया बवाल, एक की मौत

Sun, 07 Jun 2015 10:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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निषाद बिरादरी को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर रविवार को निषादों के सहजनवां में रेलवे ट्रैक जाम करने के बाद बवाल हो गया। सुबह 11 बजे झंडे-बैनर लेकर बड़ी तादाद में जुटे लोग रेलवे ट्रैक पर धरना देकर बैठ गए।
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मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बातचीत से बात न बनते देख बल पूर्वक हटाने की कोशिश की, जिससे भीड़ उग्र हो गई। बाद में बेकाबू भीड़ पर पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत हो गई।

इससे गुस्साए लोगों ने 30 से अधिक वाहनों में आग लगा दी और ट्रैक क्षतिग्रस्त कर दिया। फायरिंग और पथराव में डीआईजी समेत 40 से अधिक लोग जख्मी हो गए।

अपनी मांग को लेकर काफी संख्या में निषाद विरादरी के लोगों ने रविवार को सुबह मगहर में संत कबीर स्थली पर पंचायत की। इसके बाद राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के नेतृत्व में लोगों ने मगहर रेलवे स्टेशन और कसरवल रेलवे क्रासिंग के बीच रेलवे ट्रैक पर धरना दे दिया।
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ट्रैक बंद होने से लखनऊ से गोरखपुर आने वाली ट्रेनों को बस्ती, खलीलाबाद और गोरखपुर से लखनऊ जाने वाले ट्रेनों को यहीं रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया गया। बवाल की सूचना पर एसपी (ग्रामीण) बृजेश सिंह पहुंच गए। उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन आंदोलनकारी ट्रैक से हटने को राजी नहीं हुए।

...और बेकाबू हो गई भीड़

दोपहर करीब तीन बजे डीएम रंजन कुमार भी मौके पर पहुंच गए। उनसे हुई बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर लोगों को हटाने का प्रयास किया। पुलिस ने लाठी पटकी तो भीड़ बेकाबू हो गई।

भीड़ ने अधिकारियों पर पथराव कर दिया। पुलिस ने हवाई फायरिंग कर स्थिति संभालने की कोशिश की। इस बीच,गोली लगने से 25 वर्ष के एक युवक की मौत हो गई। यह देखकर भीड़ और हिंसक हो उठी। बेकाबू भीड़ ने आगजनी शुरू कर दी। मौके पर खड़ी मिली एक बस, एक सफारी, तीन टेंपो और 25 मोटरसाइकिलें फूंक डालीं।

पुलिस ने हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले छोड़कर किसी तरह भीड़ को खदेड़ा। फायरिंग और पथराव में 20 से अधिक घायल हुए हैं और डीआईजी समेत 20 पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए। सभी अफसर मौके पर ही मौजूद थे। युवक की मौत से गांव में भारी तनाव है। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के जिलों से भी पुलिस बल मंगाया गया है।

मामले पर डीआईजी डॉ संजीव गुप्ता ने कहा कि ट्रैक से आंदोलनकारी को हटाने पर वह उग्र हो गए और पथराव करने लगे। पथराव में मुझे भी चोट लगी। कई अन्य अधिकारी घायल हुए हैं। बाद में बल प्रयोग कर ट्रैक को खाली कराया गया। बवाल करने वालों की पहचान की जा रही है।

ये हैं निषाद समुदाय की मांगें

1. बालकृष्ण रेनुके आयोग की रिपोर्ट के अनुसार क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट से प्रभावित जातियों को 7.5 फीसदी आरक्षण दिया है, जो महाराष्ट्र सरकार ने लागू कर दिया है। यूपी सरकार भी इसे लागू करे। मछुआ समुदाय की मझवार, गोड़, तुरैहा, खरवार,बेलदार की सभी पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी हो।

2. विमुक्ति जन जाति आयोग ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा में 7.5 प्रतिशत एसटी का किसी जिले में केवट को तथा किसी जिले में मल्लाह को आरक्षण लागू था, उसे अनुसचिव समाज कल्याण अनुभाग तीन  के मोहन राव ने समाप्त कर दिया। इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए जिलेवार विसंगति को दूर कर शिक्षा में एसटी आरक्षण का लाभ पुन: बहाल किया जाए।

3. दोहरी शिक्षा नीति को समाप्त कर एक समान शिक्षा प्रणाली लागू की जाए।

4. मछुआ आयोग का गठन हो।

5. इलाहाबाद श्रृंग्वेरपुर धाम व किला पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो।

6. टोल टैक्स बंद हो और किसानों की अधिगृहीत भूमि का रायल्टी मिले।
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छह घंटे तक बंद रही ट्रेनों की आवाजाही

लखनऊ मंडल के गोरखपुर-गोंडा रेल खंड के मगहर स्टेशन पर आरक्षण की मांग करते हुए आंदोलनकारियों द्वारा रेल ट्रैक जाम किए जाने से ट्रेनों की आवाजाही छह घंटे तक बाधित रही।

बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस व बाघ एक्सप्रेस का मार्ग बदलकर भटनी से औड़िहार-वाराणसी के रास्ते चलाई गई। जबकि बांद्रा से आ रही अवध एक्सप्रेस को बस्ती तथा बांद्रा-गोरखपुर टर्मिनल को खलीलाबाद स्टेशन पर निरस्त कर दिया गया।

रविवार की सुबह करीब 11.30 बजे से एक दर्जन से अधिक ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोक दिया गया। शाम सवा पांच बजे ट्रैक खाली होने के बाद सिग्नल मिलते ही गोरखपुर से आम्रपाली एक्सप्रेस को सबसे पहले रवाना किया गया।

एनईआर के सीपीआरओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ से आ रही बाघ एक्सप्रेस को मगहर स्टेशन पर ही रोक दिया गया।

इसके अलावा गोरखपुर स्टेशन पर आम्रपाली एक्सप्रेस को करीब पांच घंटे, मोरध्वज एक्सप्रेस को चार घंटे, गोरखधाम एक्सप्रेस को तीन घंटे, वैशाली एक्सप्रेस को मैरवा स्टेशन पर तीन घंटे, सत्याग्रह एक्सप्रेस को पिपराइच स्टेशन पर साढे़ तीन घंटे, सहरसा-अमृतसर समर स्पेशल को ढाई घंटे, हाबड़ा से आ रही बाघ एक्सप्रेस को पचरुखी स्टेशन पर रोक दिया गया।

इसके अलावा 10 पैसेंजर ट्रेनों को भी कई स्टेशनों पर खड़ा कर दिया गया।
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