लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी को सेवा में कमी मानते हुए रियल एस्टेट कंपनी पर कार्रवाई की है। आयोग ने पैरामाउंट प्रोप बिल्ड प्रालि को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को स्टांप शुल्क पर ब्याज के साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा भी दे।
लखनऊ निवासी मोहम्मद आरिफ खान की पत्नी सुरैया बेगम ने वर्ष 2016 में नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पैरामाउंट फ्लोरा विले परियोजना में 70 लाख रुपये का फ्लैट बुक किया था। पूरा भुगतान करने और बिल्डर की ओर से 4.55 लाख की स्टांप ड्यूटी जमा कराने के बावजूद वर्षों तक रजिस्ट्री नहीं की गई। इस बीच 2019 में सुरैया बेगम का निधन हो गया, जिसके बाद फ्लैट आरिफ खान के नाम आवंटित हुआ, लेकिन रजिस्ट्री की समस्या बनी रही।
न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव और सदस्य सुधा उपाध्याय की पीठ ने सुनवाई के दौरान बिल्डर की दलीलों को खारिज करते हुए आदेश दिए कि स्टांप शुल्क के रूप में जमा 4,55,500 रुपये पर 28 जुलाई 2016 से 27 जनवरी 2025 तक 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। मानसिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 25,000 रुपये एक माह के भीतर अदा किया जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र प्राप्त न हो जाए, बिल्डर ग्राहकों से मेंटेनेंस शुल्क नहीं वसूल सकता।