मिट्टी की जांच के लिए निकाले टेंडरों में घपले पर कृषि विभाग के 9 अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं और विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। इनमें दो संयुक्त निदेशक, पांच उप निदेशक तथा दो सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी हैं। इन पर चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तें तय करने में मनमानी का आरोप है।
इतना ही नहीं, टेंडर के आवेदनों के साथ लगाए गए फर्जी दस्तावेजों तक को पास कर दिया था। इस पर कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कार्रवाई करते हुए ठेका पाने वाली बरेली की एस. सॉल्यूशन समेत चार फर्मों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। निविदाएं भी निरस्त कर दी गई हैं। टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
कृषि मंत्री ने बताया कि 2018-19 में मिट्टी जांच के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया में ऐसी शर्तें जोड़ दी गईं, जिनसे उससे पहले के वित्त वर्ष में काम पाने वाली फर्म एस. सॉल्यूशन को ही काम मिल सके। अपर कृषि निदेशक, बीज एवं प्रक्षेत्र वीपी सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी की जांच में यह बातें सामने आईं।
गाइडलाइंस से परे शर्तेंकेंद्र सरकार की आर्थिक मदद से चलने वाली इस योजना की गाइडलाइंस से परे जाकर आवेदन करने वाली फर्म को कम से कम 50 हजार सैंपल टेस्ट करने व यूपी में काम करने के अनुभव की शर्त रख दी गई। फर्म पर कोई मुकदमा न होने व कलेक्ट्रेट से जारी चरित्र प्रमाणपत्र भी मांगा गया। जबकि नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेंस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज (एनएबीएल) से संबंधित लैब की मान्यता के बिंदु को ही नहीं रखा गया, जो यथा संभव होना चाहिये था। ये घपले बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, झांसी और मेरठ मंडलों के टेंडरों में किए गए।
इन्हें किया गया निलंबित-