निकांत जैन को रिमांड पर देने से किया इन्कार, गिरफ्तारी के 45 दिन बाद दी गई अर्जी, कानून में 40
लखनऊ। भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में अदालत ने पुलिस कस्टडी की अर्जी खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण सत्येंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने आरोपी निकांत जैन की गिरफ्तारी के 45 दिन बाद रिमांड की अर्जी दाखिल की, जबकि कानूनन यह अर्जी अधिकतम 40 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए। पुलिस ने दो दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी।
विवेचक एसीपी विनय कुमार द्विवेदी ने तर्क दिया कि आरोपी ने सोलर ऊर्जा उपकरणों की कंपनी को प्रदेश में स्थापित करने के बदले वादी विश्वजीत दत्ता से एक करोड़ की रिश्वत ली थी। आरोपी जानता है कि रिश्वत की रकम कहां है और किसे दी गई है। इसके अलावा निकांत जैन के ऑफिस को सील कर दिया गया है, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मौजूद हैं, जिनके पासवर्ड और अन्य जानकारियां सिर्फ आरोपी के पास हैं। पुलिस ने इन्हीं आधारों पर कस्टडी मांगी थी। वहीं, आरोपी के अधिवक्ता ने भी पुलिस की मांग का विरोध करते हुए इसे विधि विरुद्ध बताया।
अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि निकांत को जिन आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है उनमें अधिकतम दस साल की सजा हो सकती है। अगर आरोपी जेल में है तो पुलिस को अधिकतम 60 दिनों में चार्जशीट दायर करनी होती है। साथ ही 40 दिन के भीतर पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन करना होता है।
निकांत जैन को रिमांड पर देने से किया इन्कार, गिरफ्तारी के 45 दिन बाद दी गई अर्जी, कानून में 40