मशहूर शायर निदा फाजली का सोमवार को निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। 29 जनवरी को लखनऊ महोत्सव में हुए मुशायरे में वह मौजूद थे। यहां उन्होंने अमर उजाला से की थी दिल की बातें। यहां है उनसे की गई बातचीत का अंश...
शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद अमजद अली के बाद अब साहित्यकारों ने भी पद्म अलंकरणों में उपेक्षा का सवाल उठाया है। प्रसिद्ध शायर निदा फाजली ने कहा कि एक दौर था जब राजनेताओं के मित्रों में साहित्यकार शामिल होते थे।
वे बहुत सारे साहित्यकारों को व्यक्तिगत तौर पर पहचानते थे, लेकिन आज के राजनेताओं को साहित्यकारों की जरूरत नहीं है। अपने एक दोहे को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि ‘क्रिकेट, नेता, एक्टर हर महफिल की शान, रद्दी में तुलने लगा गालिब का दीवान...’।
निदा फाजली ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि पद्म अलंकरण में फिल्म और खेल के लोगों को तो तरजीह दी जाती है लेकिन साहित्यकारों की राजनेता उपेक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ इन अलंकरणों की बात नहीं है, सरकार हवाई अड्डों के नाम राजनेताओं, राजा, महाराजाओं के नाम पर तो रखती है लेकिन उस क्षेत्र के साहित्यकारों की अनदेखी की जाती है। हालांकि प्रसिद्ध शायर ने इस उपेक्षा का कारण भी खुद ही बताया।