लखनऊ में वहशियों ने दो महीने के नवजात की हत्या के बाद उसके शरीर के टुकड़े पॉलीथिन में पैक करके फेंक दिए। नवजात का सिर गुडंबा की यूनिटी सिटी कॉलोनी में अखिलेश के मकान के पास खाली प्लॉट में मिला जबकि धड़ डालीगंज कबाड़ी मार्केट में टिन शेड के नीचे पाया गया।
लगभग आठ किमी. के दायरे में शव के टुकड़े मिलने की जानकारी से सनसनी मच गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सिर व धड़ को मर्च्युरी भेजा। एएसपी ट्रांस गोमती दुर्गेश कुमार ने कहा कि शव लड़के का है या लड़की का? नवजात की हत्या हुई या मौत की कोई और वजह है? इसकी छानबीन के लिए डीएनए जांच सहित अन्य जांचें कराई जाएंगी।
नवजात का धड़ सुबह करीब साढ़े सात बजे डालीगंज निवासी अमन शुक्ला को दिखा था। गुलाबी रंग की पॉलीथिन में पैक धड़ को कुत्ते नोंच रहे थे। नजारा देखकर वहां भीड़ एकत्र हो गई।
कुत्तों को भगाने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पहले तो पुलिस ने समझा कि पॉलीथिन में ऑपरेशन के बाद निकाला गया किसी के शरीर का कोई अंग है। ध्यान से देखने पर नवजात बच्चे का धड़ होने की पुष्टि हुई।
पुलिस ने शव के इस हिस्से को मर्च्युरी भेज दिया। करीब छह घंटे बाद दोपहर एक बजे गुडंबा की यूनिटी सिटी कॉलोनी में अखिलेश के मकान के पास एक खाली प्लॉट में ठीक वैसी ही गुलाबी रंग की पॉलीथिन में नवजात का सिर मिलने से हड़कंप मच गया।
डालीगंज की कबाड़ी मार्केट से इस स्थान की दूरी करीब आठ किलोमीटर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि इलाके के घरों में चौका-बर्तन करने वाली चांदनी ने पॉलीथिन के आसपास कुत्तों को मंडराता देखकर उसने सूचना दी। पुलिस ने पॉलीथिन खोला तो भीतर नवजात का सिर देखकर होश उड़ गए।
एएसपी का कहना है कि सिर व धड़ एक ही बच्चे का लग रहा है। ऐसा लगता है कि किसी ने धारदार हथियार से शव के दो टुकड़े करके उसे अलग-अलग जगह पर फेंक दिया है।
सीमा विवाद में उलझी पुलिस
डेमो
नवजात की हत्या गुडंबा में हुई या उसे हसनगंज थाना क्षेत्र के डालीगंज में मारा गया? यह सवाल पुलिस को परेशान कर रहा है। फिलहाल दोनों थानों की पुलिस एक-दूसरे के थाना क्षेत्र या कहीं और की घटना होने और शव अलग-अलग थाना क्षेत्र में फेंकने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने में जुट गई है।
पुलिस का कहना है कि जिस प्रकार नवजात के शरीर के दो टुकड़े किए गए? उससे स्पष्ट है कि किसी ने हत्या ही की है। दुधमुंहे की हत्या क्यों की गई? हत्यारे का क्या उद्देश्य था? इस बारे में पता लगाया जा रहा है। पुलिस यूनिटी सिटी कॉलोनी और डालीगंज की कबाड़ी मार्केट में सुराग तलाशने की कोशिश कर रही है।
तहजीब, नजाकत और नफासत के शहर लखनऊ को यह क्या हो गया है? यहां के लोगों की फितरत कैसी होती जा रही है? नवजात बच्चों और दुधमुहों को लोग क्यों मार रहे हैं? ... अरे, पालना नहीं है तो किसी अस्पताल में छोड़ आएं।
कम से कम बच्चे जिंदा तो रहेंगे। ...हमारा शहर बदनाम तो नहीं होगा! डालीगंज की कबाड़ी मार्केट में शव मिलने के बाद जुटे लोग कुछ इसी तरह की बातें कर रहे थे। अमन शुक्ला ने कहा कि अखबारों में नवजातों के शव सड़क, नाले और कूड़े के ढेर में मिलने की खबरें लगभग रोज पढ़ने को मिल रही हैं।
कितने निर्दयी होते हैं ऐसे माता-पिता जो अपने दिल के टुकड़ों को मारकर फेंक देते हैं। नौ महीने कोख में पालने वाली मां का कलेजा भी नहीं हूकता।
कहीं बलि तो नहीं दी गई!
नवरात्रि की पहली सुबह नवजात का शव टुकड़ों में मिलने के पीछे बलि की भी आशंका जताई जा रही है। मौके पर जुटे लोगों ने कहा कि हो सकता है कि नवरात्र में देवी को खुश करने के लिए किसी तांत्रिक ने बच्चा चोरी करके उसकी बलि दे दी हो और शव को अलग-अलग जगह पर फेंक दिया।
हालांकि, पुलिस इस आशंका से सहमत नहीं दिखी। पुलिस का कहना है कि अगर नवजात की बलि दी गई होती तो सिर व धड़ पर कुछ न कुछ ऐसे लक्षण जरूर मिलते।
यह बात अलग है कि पुलिस ने गुपचुप तरीके से कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों की पड़ताल शुरू कर दी है। तांत्रिकों और ऐसे अनुष्ठान करने वाले लोगों से भी संपर्क किया जा रहा है।