माल के करेंद गांव स्थित मंदिर की सीढ़ियों पर मिली बच्ची
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लखनऊ के माल में मंदिर की सीढ़ियों पर मिली मासूम, बोल नहीं सकती वह, पर उसकी मासूमियत खड़े कर रही कई सवाल, आप भी पढ़िए क्या कहना चाहती है वो। मैं एक बेटी हूं...। मेरा कोई नाम नहीं...। नहीं मालूम किसी को कि मेरे माता-पिता कौन है..। मुझे तो सिर्फ अहसास भर है कि मेरी मां ने नौ महीने तक मुझे कोख में रखा, बड़े जतन से पाला।
फिर छह नवंबर 2019 को वो दिन आ गया कि मुझे मेरी मां गर्भ से निकाल कर इस दुनिया में ले आई। यूं ही नहीं, उसकी प्रसव वेदना का मुझे अहसास है कि कितना तड़पी थी वह। मुझे लगा कि इतना दर्द सह कर भी मुझे मेरे पालनहार ने जतन से सहेजा है तो मैं इस दुनिया को देखूंगी, भरपूर जिऊंगी और खूब रोशन करूंगी अपने माता-पिता का नाम।
मेरे सपने, मेरी सोच उस वक्त रेत की मानिंद उड़ती नजर आई, जब मेरा जन्म होते ही मुझे मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ दिया गया। उस वक्त मुझे अहसास हुआ कि बेटियों के प्रति संवेदनहीनता आज भी पल-बढ़ रही है
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