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संवेदनहीनता: लखनऊ फिर शर्मसार, मंदिर की सीढ़ियों पर मिली नवजात, नीला पड़ गया था शरीर

Fri, 08 Nov 2019 04:35 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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माल के करेंद गांव स्थित मंदिर की सीढ़ियों पर मिली बच्ची - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ के माल में मंदिर की सीढ़ियों पर मिली मासूम, बोल नहीं सकती वह, पर उसकी मासूमियत खड़े कर रही कई सवाल, आप भी पढ़िए क्या कहना चाहती है वो। मैं एक बेटी हूं...। मेरा कोई नाम नहीं...। नहीं मालूम किसी को कि मेरे माता-पिता कौन है..। मुझे तो सिर्फ अहसास भर है कि मेरी मां ने नौ महीने तक मुझे कोख में रखा, बड़े जतन से पाला।

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फिर छह नवंबर 2019 को वो दिन आ गया कि मुझे मेरी मां गर्भ से निकाल कर इस दुनिया में ले आई। यूं ही नहीं, उसकी प्रसव वेदना का मुझे अहसास है कि कितना तड़पी थी वह। मुझे लगा कि इतना दर्द सह कर भी मुझे मेरे पालनहार ने जतन से सहेजा है तो मैं इस दुनिया को देखूंगी, भरपूर जिऊंगी और खूब रोशन करूंगी अपने माता-पिता का नाम।

मेरे सपने, मेरी सोच उस वक्त रेत की मानिंद उड़ती नजर आई, जब मेरा जन्म होते ही मुझे मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ दिया गया। उस वक्त मुझे अहसास हुआ कि बेटियों के प्रति संवेदनहीनता आज भी पल-बढ़ रही है।

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भला हो इन गैरों का जिन्होंने बचा लिया

सीढ़ियों पर मिली बच्ची - फोटो : अमर उजाला
मैं तो माल के करेंद गांव स्थित ब्रह्मदेव मंदिर की सीढ़ियों पर पड़ी थी। महज एक कपड़े में लपेटी गई थी, सर्द रात में नीला पड़ गया था मेरा शरीर। बृहस्पतिवार की सुबह मंदिर आने वालों की नजर मुझ पर पड़ी, भला हो पुजारीजी का जिन्होंने पुलिस को सूचना दी। सोशल मीडिया पर मेरे मिलने की खबर वायरल हुई।

प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र कुमार ने मुझे निसंतान दंपती को सौंपा, तब तक चाइल्ड लाइन के सदस्य विजय शंकर पाठक व स्वयंसेवक गौरी शर्मा आ गए। मुझे ले गए। चाइल्ड लाइन के परामर्शदाता कृष्ण प्रताप ने मुझे श्रीराम औद्योगिक अनाथालय अलीगंज में आश्रय दिलाया है। इन गैरों का शुक्रिया, जिन्होंने मुझे बचा लिया।
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