लिवर सिरोसिस (यकृत में सिकुड़न) का पता लगाने के लिए अब ‘बायोप्सी’ का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
अल्ट्रासाउंड की तरह की एक नई तकनीक ‘फाइब्रोस्कैन’ ने इस जांच को आसान बना दिया है।
संजय गांधी पीजीआई के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग ने इस मशीन से मरीजों के लिवर की जांच शुरू कर दी है।
गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के हेड प्रो.वी.सारस्वत ने बताया कि बायोप्सी से लिवर की कई तरह की जांच हो जाती हैं।
जबकि फाइब्रोस्कैन से सिर्फ सिकुड़न का ही पता लगता है। बायोप्सी कराने से डरने वाले मरीजों के लिए ये तकनीक बहुत ही कारगर है, क्योंकि इससे मरीज को दर्द का एहसास ही नहीं होता।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2012 में इस मशीन को ट्रायल पर एसजीपीजीआई लाया गया था। जांच में पूरी तरह से खरा उतरने के बाद मई 2013 से इससे विधिवित मरीजों की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच का शुल्क एक हजार रुपये रखा गया है। प्रो. सारस्वत ने बताया कि प्रदेश में एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में ही सिर्फ ये मशीन है।
उन्होंने बताया कि लिवर में सिकुड़न की इस मशीन से सटीक जानकारी मिल जाती है।