डिफाल्टर पार्श्वनाथ डवलपर ने एलडीए से पूर्णता प्रमाण पत्र (कंपलीशन सर्टिफिकेट) मांगा है, लेकिन प्राधिकरण ने इस पर आपत्ति लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
उपाध्यक्ष ने कहा है कि एलडीए के बकाया धन और आवंटियों को फ्लैट न दिए जाने की जांच होगी। इन मुद्दों पर क्लीन चिट मिलने के बाद ही डवलपर को हरी झंडी मिलेगी।
दूसरी ओर, पार्श्वनाथ प्लैनेट के आवंटियों ने सोमवार को उपाध्यक्ष से मुलाकात कर के एक बार फिर से विकासकर्ता की शिकायत की है। उनका आरोप है कि कंपनी कंपलीशन सर्टिफिकेट लेकर यहां से खिसकने की तैयारी में है।
पार्श्वनाथ प्लैनेट ग्रुप हाउसिंग गोमती नगर के विभूतिखंड में निर्माणाधीन है। इस ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट एलडीए ने नीलामी के माध्यम से पार्श्वनाथ को बेचे थे।
कंपनी ने शुरुआती पेमेंट तो किया था, मगर बाद में उस पर काफी धन बकाया था। बाद में यह रुपया ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज सहित बढ़ते हुए लगभग 15 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था।
कंपनी का अब दावा है कि, उसके चार टॉवर पूरे हो चुके हैं। ऐसे में अब उसको कंपलीशन मिल जाना चाहिए। नगर नियोजन विभाग ने यह फाइल आखिरकार उपाध्यक्ष को पास करने के प्रेषित की थी। मगर उपाध्यक्ष ने इस फाइल पर आपत्ति लगा दी है।
450 आवंटियों का 2 अरब रुपया फंसा
पार्श्वनाथ प्लैनेट बिल्डिंग के खड़े हुए टॉवर और परिसर में लगी निर्माण सामग्री का ढेर यहां के 450 आवंटियों को मुंह चिढ़ाता है। पिछले करीब छह साल से इस बिल्डिंग का निर्माण ही नहीं पूरा है।
जबकि आवंटियों के एसोसिएशन के अध्यक्ष जवाहर भाटिया ने सोमवार को प्राधिकरण उपाध्यक्ष से शिकायत की है कि, कंपनी की नीयत उन लोगों को फ्लैट न देकर रुपया रिफंड करने की है।