फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक ऐसा इंजन जो ट्रेन के धीरे होते ही ईंधन बचाएगा

Tue, 20 Aug 2013 10:05 AM IST
लखनऊ/निशांत यादव
विज्ञापन
विज्ञापन
पटरियों पर दौड़ रहा रेलवे डीजल इंजन अब जरूरत के हिसाब से ईंधन फूंकेगा। अधिक बोगियों के साथ दौड़ रहा इंजन धीमा होने पर कम ईंधन फूंकेगा।
विज्ञापन


अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) ने जरूरत के हिसाब से ईंधन फूंकने वाले 2400 हार्सपावर की क्षमता के एक डीजल इंजन में तीन जेनसेट तकनीक का विकास किया है।

इंजन का प्रोटोटाइप तैयार हो गया है और उसे इटारसी डीजल शेड में परीक्षण के लिए भेजा गया है।

20 फीसदी ईंधन की हो रही बचत
इटारसी की ट्रेनों में दौड़ रहे इस इंजन से 20 प्रतिशत ईंधन बचने की रिपोर्ट मिली है। अभी डीजल इंजन एक ही जेनसेट से चलता है। ऐसे में उसके स्टेशनों व आउटरों पर खड़े होने, धीमी गति और तेज गति से दौड़ने पर ईंधन की खपत अधिक होती है।
विज्ञापन


20 बोगियों वाली ट्रेन चलाने के लिए रेलवे को अपने डीजल इंजन पर प्रति किलोमीटर दस लीटर डीजल खर्च करना पड़ता है। इसे देखते हुए आरडीएसओ ने ऐसा डीजल इंजन तैयार करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जो जरूरत के हिसाब से ईंधन खर्च करे।

एक जेनसेट ही करेगा काम
इस तकनीक में खड़ी हुई ट्रेन का केवल एक जेनसेट काम करेगा और दो जेनसेट ऑटोमेटिक बंद हो जाएंगे। ट्रेन स्टेशन से छूटने के बाद उसके आउटर तक पहुंचने में दूसरा जेनसेट काम करना शुरू कर देगा, जबकि आउटर के बाद ट्रेन की अपनी गति पकड़ने पर तीसरा जेनसेट भी शुरू हो जाएगा। इससे धीमी गति से चल रही ट्रेन का ईंधन 20 प्रतिशत बचेगा।
विज्ञापन

इतना खर्च करता है रेलवेरेलवे सालाना औसतन 2.6 करोड़ लीटर डीजल अपनी ट्रेनें चलाने क लिए खर्च करता है। वर्ष 2013-14 में करीब तीन करोड़ लीटर डीजल खर्च का अनुमान है। इस पर करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च होगा। इस तीन जेनसेट के इंजन के बाद रेलवे सालाना करीब 200 से 250 करोड़ रुपये बचत कर सकेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें