फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: एससीआर के पांच जिलों में बनेंगे नए एसटीपी, गंदा पानी नहीं जाएगा नदी में

विज्ञापन
गोमती में बहती नाले की गंदगी।
विज्ञापन
लखनऊ। यूपी स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में आने वाले आसपास के छह जिलों में से पांच में बहने वाले गंदे नालों और गोमती व सई नदी को साफ करने के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है। अर्बन सीवेज ट्रीटमेंट फैसिलिटी के तहत लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव और रायबरेली में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगेंगे। इन पर 300 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। यह योजना 2051 तक बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। योजना को काम शुरू होने के बाद दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन

शहर की जल निकासी वाले 26 नाले पहले गोमती में गिरते थे, जिन्हें बीते कुछ वर्षों में बंदकर भरवारा और दौलतगंज एसटीपी से जोड़ा गया, मगर सात बड़े नालों की गंदगी अब भी सीधे गोमती नदी में गिरती है। इनसे गोमती प्रदूषित हो रही है। इसके अलावा कई ऐसे पुराने नाले भी गोमती को प्रदूषित कर रहे हैं, जिन्हें एसटीपी से जोड़ा जा चुका है। कुछ नए नाले भी गोमती को प्रदूषित कर रहे हैं।
अभी शहर में निकलने वाले सीवर और नालों के पानी को ट्रीट करने के लिए शहर में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनमें एक गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र के भरवारा, दूसरा पुराने लखनऊ के दौलतगंज और तीसरा लोहिया पथ पर हैदर कैनाल पर बना है। शहर में अभी करीब 790 एमएलडी सीवर और नालों का पानी निकलता है और ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ 520 एमएलडी के ही है। ऐसे में 270 एमएलडी सीवर बिना ट्रीट हुए ही सीधे गोमती में जा रहा है।
विज्ञापन

एससीआर में एसटीपी बनने के बाद घर और नालों का गंदा पानी सीधे नदी में नहीं जाएगा। गंदे पानी से फैलने वाली डायरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों में कमी आएगी। एसटीपी से ट्रीट हुआ पानी पार्क और खेती में इस्तेमाल हो सकेगा, इससे भूजल स्तर भी सुधरेगा।
लखनऊ में यहां बनेंगे एसटीपी
बिजनौर - 100 एमएलडी - निर्माणाधीन
लोनिया पुरवा - 50 एमएलडी - निर्माणाधीन

बरीकला - 3.5 एमएलडी- निर्माणाधीन

बसंतकुंज - 145 एमएलडी - प्रस्तावित

वजीरगंज - 60 एमएलडी- प्रस्तावित
जियामऊ - 132 एमएलडी - प्रस्तावित
मस्तेमऊ - 5 एमएलडी - प्रस्तावित

इन जिलों का हाल
- बाराबंकी में पहला एसटीपी बनेगा। यहां पर अभी कोई प्लांट नहीं है। यहां 76 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाने की जरूरत होगी।
- नवाबगंज में 48 एमएलडी का एसटीपी बनाया जाएगा।
- सीतापुर में भी एसटीपी नहीं है। यहां 27 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जाएगा। इसके बनने से सई नदी प्रदूषित होने से बचेगी।
- उन्नाव में 18 एमएलडी का एसटीपी बनाया जाएगा।
- रायबरेली में 25 एमएलडी का एसटीपी बनेगा।
Iएससीआर में आने वाले पांच शहरों में सीवर निस्तारण के लिए नए एसटीपी बनाए जाने हैं। इससे जिलों में सीवर निस्तारण बेहतर होगा और नदियां भी प्रदूषण मुक्त होंगी। योजना का प्रेजेंटेशन एससीआर की समिति के सामने हो चुका है।I
विज्ञापन

I- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीएI

गोमती में बहती नाले की गंदगी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें