लखनऊ विश्वविद्यालय और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में इस साल पीएचडी व एमफिल के दाखिले नए नियमों के अनुसार होंगे।
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना को ऑर्डिनेंस में समाहित करने के लिए इन दोनों विश्वविद्यालयों ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इसे लागू करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्देश दिए थे। नए नियमों के तहत छात्र-छात्राएं अब अपनी पीएचडी छह साल तक भी पूरी कर सकेंगे।
अभी तक कोई भी छात्र सिर्फ चार साल तक ही रिसर्च स्कॉलर के रूप में काम करता था, जबकि थीसिस जमा करने के लिए सात साल तक का समय मिलता है।
वहीं, पीएचडी पूरी करने का न्यूनतम समय दो से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इसमें छह माह का कोर्स वर्क भी शामिल होगा। नए गैजेट में एमफिल को फिर से दो समेस्टर का कर दिया गया है।
वर्ष 2015 में ही लखनऊ विश्वविद्यालय और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में एमफिल के कोर्स को दो से बढ़ाकर तीन समेस्टर का किया गया था।
मगर, अब इसे फिर से दो समेस्टर करना होगा और इसे पूरा करने के लिए दो समेस्टर यानी एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
पहले इसमें केवल छह माह का ही अतिरिक्त समय मिलता था। इसके अलावा एमफिल के डाइजर्टेशन को अब बाहरी परीक्षक द्वारा जांचा जाएगा।
एक तरफ जहां यूजीसी ने सभी के लिए पीएचडी करने की अवधि बढ़ाई है, वहीं महिलाओं और दिव्यांगों को विशेष राहत भी दी है। अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में महिलाओं और 40 फीसदी से अधिक निशक्तों को पीएचडी करने के लिए दो साल अतिरिक्त दिए जाएंगे।