मुख्य सूचना आयुक्त के पद का कार्यभार ग्रहण करने में जावेद उस्मानी का सरकार से किया एक वादा आड़े आ गया है।
बताया जाता है कि उस्मानी ने 2011 में स्टडी लीव पर जाने के समय केंद्र सरकार के समक्ष एक बांड भरा था।
इसमें वादा किया गया था कि यदि वह 22 मार्च 2015 के पहले सरकारी नौकरी छोड़ते हैं तो वह 25 लाख रुपये सरकार को वापस कर देंगे। अब यही वादा अड़चन बनकर आ गया है।
बताया जाता है कि उस्मानी को मुख्य सूचना आयुक्त का पद ग्रहण करने के पहले वीआरएस लेना है। वीआरएस के लिए केंद्र से क्लीयरेंस मिलना जरूरी है। अब केंद्र से क्लीयरेंस में यह वादा आड़े आ गया है।
बताया जा रहा है कि उस्मानी ने केंद्र से इस रकम की माफी के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी तक बात बन नहीं पाई है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इस समस्या के समाधान के तीन फार्मूले हैं।
पहला, उस्मानी स्वयं 25 लाख केंद्र को वापस करें। दूसरा, केंद्र इसे माफ कर दे। तीसरा, उस्मानी 22 मार्च तक नौकरी करें और इसके बाद फिर से वीआरएस के लिए आवेदन करें।
ऐसे में यदि तीसरी संभावना बढ़ी तो मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी अभी काफी दिन तक खाली रहेगी।