प्रदेश में निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खोलने वालों को सुविधाओं का लाभ देने के लिए आवास विभाग ने हरी झंडी दे दी है।
निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के उद्देश्य से जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए अब सिर्फ एक रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से परिवर्तन शुल्क देना होगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने शासनादेश जारी कर दिया है।
राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए नीति निर्धारित की है। इसके तहत कई सुविधाएं देने का आदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग पूर्व में कर चुका है।
इसमें जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन और मानचित्र पास करने संबंधी सुविधाएं शामिल हैं। आवास विभाग से इस संबंध में आदेश जारी न होने की वजह से विकास प्राधिकरण निजी मेडिकल कॉलेज खोलने वालों को इसका लाभ नहीं दे रहे थे।
इस बारे में मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में पिछले दिनों बैठक बुलाई गई थी। इसके आधार पर यह आदेश जारी किया गया है।
शासनादेश के मुताबिक भू-उपयोग परिवर्तन के आदेश पर सक्षम अधिकारी को एक माह के अंदर निर्णय करना होगा।
हरित पट्टी, तालाब, पोखरे आदि की जमीन का भू-उपयोग निजी मेडिकल कॉलेज के लिए नहीं बदला जाएगा। कॉलेज प्रबंधकों से विकास शुल्क, मलबा शुल्क तथा निरीक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।