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नई पेंशन योजना से लटका डेढ़ लाख शिक्षकों का भविष्य

Sun, 15 Dec 2013 10:09 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
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प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की पेंशन फंस गई है।
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इनको पुरानी पेंशन योजना से तो वंचित किया ही गया पर नई पेंशन योजना का लाभ देने के लिए वेतन से कटौती तक नहीं शुरू की गई।

स्थिति यह है कि कुछ जिलों को छोड़ दें तो अधिकतर में शिक्षकों को परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर तक आवंटित नहीं किया गया।

इसके चलते दुर्घटनावश मौत की काल में जाने वाले शिक्षकों के परिजनों को कोई लाभ तक नहीं मिल पा रहा है।

प्रदेश के बच्चों को शिक्षित करने के लिए बेसिक व माध्यमिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है।

प्रदेश में 1 अप्रैल, 2005 को पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त करते हुए नई पेंशन व्यवस्था बहाल की गई है।

इस व्यवस्था में शिक्षकों के वेतन से होने वाली 10 फीसदी कटौती को मार्केट में लगाया जाएगा और इससे होने वाले लाभ के आधार पर पेंशन दी जाएगी।

नई पेंशन व्यवस्था के तहत प्रदेश के अन्य विभागों में अप्रैल 2005 से नियुक्ति कर्मियों को तो परमानेंट रिटायर एकाउंट नंबर आवंटित कर दिया गया है, लेकिन शिक्षा विभाग में सभी शिक्षकों को यह नंबर आवंटित नहीं किया जा सका है।

इसके लिए शासन और निदेशालय के बीच समन्वय न होना भी बताया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शासन स्तर पर इस संबंध में होने वाली बैठक में निदेशालय के अधिकारी और वित्त नियंत्रक नहीं पहुंच रहे हैं।
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संयुक्त सचिव माध्यमिक शिक्षा डॉ. प्रभा मिश्रा ने इस पर खेद व्यक्त करते हुए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

पुरानी पेंशन योजना
पुरानी पेंशन योजना में शिक्षक के वेतन से 10 फीसदी होने वाली कटौती को जीपीएफ में डाला जाता था। शिक्षक पांच साल के सेवा के बाद चाहता था तो कुल कटौती का 50 फीसदी ऋण ले सकता था।

20 साल की सेवा या फिर रिटायरमेंट में 10 साल शेष रहने पर वह 75 फीसदी एडवांस ले सकता था और इसे वापस करने की जरूरत नहीं थी। रिटायरमेंट पर शिक्षक को जीपीएफ का पैसा मय ब्याज के दिया जाता था।

इसके आधार पर रिटायरमेंट के 10 माह का आखिरी वेतन का औसत या आखिरी वेतन का 50 फीसदी पेंशन निर्धारित किया जाता था। इस हिसाब से रिटायर होने वाले शिक्षक को नवनियुक्त होने वाले शिक्षक के समान पेंशन मिलती थी।

नई पेंशन योजना
नई पेंशन योजना में शिक्षक के वेतन से 10 फीसदी कटौती होती है और इतने ही अंशदान की सरकार की तरफ से व्यवस्था है। यह जमा होता रहेगा, लेकिन शिक्षक इसे निकाल नहीं पाएगा। इस पैसे को बाजार में लगाया जाएगा।
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यदि लाभ हुआ तो शिक्षक को फायदा मिलेगा। शिक्षक के कुल कटौती का 60 फीसदी उसे एक मुश्त दे दिया जाएगा और 40 फीसदी के आधार पर पेंशन का निर्धारण करने की व्यवस्था की गई है। यह पेंशन कितनी होगी यह उस समय तय किया जाएगा। इससे शिक्षकों को नुकसान है।
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