लखनऊ। जिला कृषि अधिकारी ने जनपद के खाद विक्रेताओं को नोटिस जारी कर थोक विक्रेताओं से खरीदे जाने वाली खाद, कीटनाशक आदि का अधिकार पत्र रखने को कहा है। इससे दुकानदारों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि वह 50 तरह के उत्पाद दुकानों पर रखते हैंं, हर उत्पाद का अधिकार पत्र वह कैसे रख पाएंगे। दुकानदारों ने जल्द ही कृषि विभाग के खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू की है।
जिला कृषि अधिकारी की ओर से बृहस्पतिवार को जारी निर्देश में कहा गया कि विक्रेता जिस कंपनी का उत्पाद है, उससे अनिवार्य रूप से बिल प्राप्त कर सुरक्षित रखें। निरीक्षण के समय अधिकारी के मांगने पर बिल को दिखाएं। निर्देश दिए कि विक्रेता सिर्फ वही उत्पाद खरीद बेच सकते हैं जिसका उनके पास अधिकार पत्र होगा। कीटनाशक विक्रेता किसानों को अनिवार्य रूप से बिक्री का बिल देंगे। ग्रो फूड सेफ अभियान के पोस्टर की फ्रेमिंग भी करावएंगे। स्टाक रजिस्टर व सेल रजिस्टर रखना होगा। प्रतिबंधित रसायनों की बिक्री नहीं कर सकेंगे। जिला कृषि अधिकारी के नए फरमान पर दुकानदारों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि गलत नीतियों का विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। जल्द ही आंदोलन करेंगे।
सरकार निकाले बीच का रास्ता
बीकेटी स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रो. सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि सरकार कृषि सेवा केंद्र खोलने का लाइसेंस सिर्फ बीएससी कृषि ऑनर्स को ही देती है। दिक्कत वह लोग पैदा कर रहे हैं, जो लाइसेंस किराये पर लेकर दुकान चला रहे हैं। सरकार को चाहिए कि कृषि स्नातकों को प्रशिक्षित किया जाए, तकनीकी जानकारी से अवगत कराया जाए। क्योंकि, ताबड़तोड़ छापेमारी से यह डरे हुए हैं। जो गड़बड़ी कर रहे हैं उनके लाइसेंस रद्द हों, लेकिन सबको न डराया जाए। दूसरी बात सरकार पहले प्रशिक्षित करे उसके बाद लाइसेंस जारी करे। इस तरह छापेमारी और प्रताड़ना से छात्र स्वरोजगार से दूर ही होंगे।